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मुनक्का : नजला एलर्जी, सर्दी-जुकाम, वीर्य विकार, खून विकार

मुनक्का :
मुनक्का यानी बड़ी दाख को आयुर्वेद में एक
औषधि माना गया है। बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख
से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में
मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ
औषधि माना गया है।

मुनक्का के औषधीय उपयोग इस
प्रकार हैं-

– शाम को सोते समय लगभग 10 या 12
मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह
उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन
मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून
बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ
होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है।
मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।
– 250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक
चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के
विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून
के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।
– मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। भूने
हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में
रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के
दर्द में लाभ होता है।
– जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है
या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ
बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच
मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से
पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।
– जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें
दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक
खिलाएं।
सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से
पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से
ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम
पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें।

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