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जिस फूल से बनती है देशी शराब उसके फायदे इन रोगों में रामबाण

महुआ भारत के कई प्रान्तों में पाया जाता है, इसका वृक्ष काफी लम्बा चौड़ा होता है, यह गुजरात में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

इसके पत्ते बादाम के पत्तों की तरह होते है, इनकी पत्तल बनाई जाती है। महुआ के फूल सफेद, फल कच्चे हरे, पकने पर पीले तथा सूखने पर लाल व हल्के मटमैले रंग के हो जाते हैं। इसके फूल मीठे, फल कड़वे और पकने पर मीठे हो जाते हैं।

महुआ का पेड़ आदिवासियों के लिए बहुत महत्व रखता है. आदिवासी लोग न सिर्फ खाने के लिए बल्कि ईंधन के रूप में भी महुआ का उपयोग करते हैं।

क्या आपने कभी महुआ का नाम सुना है, अगर नहीं तो आज इस लेख में हम आपको महुआ के फायदों और नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं, क्योंकि महुआ खाने में जितना टेस्टी होता है, उतना ही ये सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

महुआ के पेड़ जंगल और पर्वतों पर पाए जाते हैं। इसके पेड़ ऊंचे और बड़े-बड़े होते हैं। इसके फूल में शहद के समान गन्ध आती है तथा बीज शरीफे की भांति होते हैं। इसके पेड़ की तासीर ठंडी होती हैं। मगर यूनानी मतानुसार महुआ गर्म है। महुआ के फूल का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर में दर्द शुरू हो जाता है।

महुआ में क्या पाया जाता है

महुआ में कार्बोहाइड्रेट, फैट, और प्रोटीन के साथ ही कैल्शियम, फास्फोरस आयरन, कैरोटीन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इतने पोषक तत्वों से भरे होने के कारण इसे खाने के बहुत से फायदे होते हैं।

महुआ की खासियत

महुआ की छाल का इस्तेमाल क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, डायबिटीज मेलिटस और ब्लीडिंग में किया जाता है. गठिया और बवासीर की दवाई के रूप में महुआ की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसकी जड़ सूजन, दस्त और बुखार में बहुत असरकारक होती है. खास बात ये हैं महुआ बहुत लंबे समय तक सुखा कर स्टोर किया जा सकता है. एक बार जब ये सूख जाता है तो सालों तक इसका प्रयोग किया जा सकता है।

महुआ के औषधीय फायदे

गठिया रोग – महुआ की छाल का काढ़ा बना कर दिन में तीन बार पीने से गठिया रोग में लाभ मिलता है। महुआ की छाल को पीस कर गर्म करके लेप करने से भी गठिया रोग में आराम मिलता है।

बुखार – महुआ के फूल का काढ़ा बना कर लगभग 20 मिलीलीटर दिन में 2 से 3 बार लेने पर बुखार दूर होता है साथ ही शरीर को शक्ति मिलती है।

चेहरे के दाग धब्बे – महुए की छल का काढ़ा पीने से दाग धब्बे कम हो जाते हैं तथा खाज खुजली की वजह से हुए जख्म भी सही हो जाते हैं।

दांतों की मजबूती – महुआ या आंवले की टहनी से दातून करने से दांतों का हिलना बंद हो जाता है। इससे दांत मजबूत हो जाते है तथा मसूढ़ों से खून आना भी बंद हो जाता है।

खांसी – महुआ के फूल का काढ़ा सुबह शाम पीने से खांसी में आराम मिलता है, महुआ के पत्तों का काढ़ा बना कर पीने से भी खांसी दूर हो जाती है।

मिर्गी – छोटी पीपल, बच, काली मिर्च तथा महुआ को सेंध नमक मिला कर पानी के साथ लेने पर मिर्गी, पागलपन, (वात, पित्त तथा काफ के एक साथ बिगड़ने) तथा गैस आदि के रोग में लाभ मिलता है।

बवासीर – महुआ के फूल को पीस कर छाछ में मिलकर एक कप सुबह शाम लेने से बवासीर में आराम मिलता है।

घुटने का दर्द- महुआ के फूल को बकरी के दूध में पकाकर पीने से घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।

मासिक-धर्म के विकार – महुआ के फलों की गुठली तोड़कर गिरी निकाल लें, इसे शहद के साथ पीसकर गोल मोमबत्ती जैसा बना लें, रात में सोने से पहले, मासिक-धर्म आने के समय के पहले से इसे योनि में उंगली की सहायता से प्रवेश करके रख दें, इससे मासिक-धर्म के विकार दूर हो जाते हैं और मासिकस्राव बहना बंद हो जाता है।

पेट के कीड़े मारने में मददगार – महुआ का सेवन पेट के कीड़ों को मारने में मददगार होता है. बच्चों को अक्सर पेट में कीड़े हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें महुए की छाल का काढ़ा दें और महुए की रोटी खिलाएं तो कीड़े मर जाते हैं. इसके अलावा दस्त या अपच होने पर मुहआ की छाल का रस पीएं, इससे आराम मिलता है।

डायबिटीज में होता है ‘अमृत’ – डायबिटीज मरीजों के लिए महुआ अमृत से कम नहीं है. डायबिटीज बीमारी के खिलाफ महुए की छाल अमृत की तरह काम करती है. हालांकि महुआ के फूल का प्रयोग डायबिटीज रोगियों को नहीं करना चाहिए।

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