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नसों के दर्द का घरेलू उपाय | Veins Pain Remedies

हमारे पैर के नसों में अक्‍सर होने वाले अनचाहे दर्द की कई वजहें हो सकती हैं. जैसे इसके कुछ कारण तो मांसपेशियों में सिकुड़न, मांसपेशियों की थकान, ज्यादा टहलना करना, व्यायाम, तनाव, खून के थक्के जमने से बनी गांठ, घुटनों, हिप्स व पैरों में ठीक ढंग से रक्त संचरण न हो पाना आदि हैं।

इसके अलावा पानी की कमी, सही भोजन न ले पाना, खाने में कैल्शियम और पोटेशियम जैसे खनिज पदार्थ और विटामिंस की कमी, अंदर गहरी चोट का लगना, किसी भी प्रकार का संक्रमण हो जाना, नाखून का पकना आदि भी इसके कारणों में शामिल हैं. कई बार तो शरीर की हड्डियों में कमजोरी होने से भी पैरों में दर्द की शिकायत हो जाती है।

रासायनिक दवाइयों को ज्यादा मात्रा में लेने, चोट, त्वचा और हड्डियों से संबंधित संक्रमण, ट्यूमर, मोटापा, शुगर, आर्थराइटिस, हारमोनल प्रॉब्लम, नसों में दर्द और कोलेस्ट्रॉल के लेवल कम होने से भी पैर की नसों में दर्द की समस्या देखी जाती है। आइए All Ayurvedic के माध्यम से पैर की नसों में होने वाले दर्द के कारण, लक्षण, नसों के दर्द की पहचान और घरेलू उपचारों के बारे में जानते है…

हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हमारी नसें होती हैं, जो हमारे शरीर में रक्त संचारित करती रहती है, जो हमें जिन्दा रहने के लिए बहुत अहम होता है। पर कई बार कुछ कारणों से ये कमजोर पड़ जाती हैं जिसकी वजह से हमें कई शरीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नर्व पेन या न्यूरॉल्जिया किसी खास नर्व में होता है। न्यूरॉल्जिया में जलन, संवेदनहीनता या एक से अधिक नर्व में दर्द फैलने की समस्या हो सकती है। न्यूरॉल्जिया से कोई भी नर्व प्रभावित हो सकती है। नसों में दर्द के सही मतलब और इसके उपचार के बारे में जानने के लिए यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ें और जानकारी जन उपयोगी लगे तो मित्रों के साथ शेयर करे।

नसों (नर्व) के दर्द के कारण

ड्रग्स, रसायनों के कारण परेशानी, क्रॉनिक रिनल इनसफिशिएंशी, मधुमेह, संक्रमण, जैसे-शिंगल्स, सिफलिस और लाइम डिजीज, पॉरफाइरिया, नजदीकी अंगों (ट्यूमर या रक्त नलिकाएं) से नर्व पर दबाव पड़ना, नर्व में सूजन या तकलीफ, नर्व के लिए खतरे या गंभीर समस्याएं (इसमें शल्यक्रिया शामिल है), अधिकतर मामलों में कारण का पता नहीं चलता।

नर्व पेन एक जटिल और क्रॉनिक तकलीफदेह स्थिति है, जिसमें वास्तविक समस्या समाप्त हो जाने के बाद भी दर्द स्थायी रूप से बना रहता है। नर्व पेन में दर्द शुरू होने और रोग की पहचान होने में कुछ दिन से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं। नर्व को थोड़ा सा भी नुकसान पहुंचने पर या पुराने चोट ठीक हो जाने पर भी दर्द शुरू हो सकता है।

नसों के दर्द के क्‍या हैं लक्षण

जलन की अनुभूति, संवेदनहीनता और पूरे नर्व में दर्द
शरीर के प्रभावित भाग की गति औऱ कार्य-प्रणाली मांसपेशियों की कमजोरी, दर्द या नर्व की क्षति के कारण अवरुद्ध हो जाती है। दर्द अचानक उठता है और बहुत तेज दर्द होना, जैसे-कोई नुकीली चीज चुभ रही हो या जलन की अनुभूति होती है। यह दर्द लगातार रह सकता है या रुक-रुक कर होता है।

छूने या दबाने से दर्द महसूस होता है और चलना फिरना भी कष्टदायक हो जाता है। प्रभावित नर्व के पथ में दर्द रहता है या यह दर्द बार-बार होता है।

यदि आपके शरीर की नसें कमज़ोर हो गई हैं, तो इससे शरीर में होने वाले इफ़ेक्ट की पहचान करना जरूरी होता है जिससे सही इलाज करने में सहायता मिलती है।

यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं। चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।

रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है। अपच होना भी एक संकेत है। अनिन्द्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी। हदय-स्पंदन शरीर में खून की कमी होना।

नस दबने की या नसों में होने वाले दर्द की पहचान कैसे करें?

जब कोई नस किसी प्रकार से क्षतिग्रस्त हो जाती है और अपने पूरे सिग्नल भेजने में असमर्थ हो जाती है तब नस में दर्द होता है। यह नस के दबने के कारण होता है जो हर्नियेटेड डिस्क, आर्थराइटिस या बोन स्पर (bone spur) के कारण हो सकता है।

चोट लगने, गलत तरीके के पोस्चर से, बार-बार की गतिविधियों से, खेल और मोटापे जैसी स्थितियों और गतिविधियों से भी नसों में दर्द हो सकता है। पूरे शरीर में किसी भी जगह की नस दबाने से पीड़ा हो सकती है लेकिन ये आमतौर पर रीढ़ (स्पाइन), गर्दन, कलाई और कोहनियों में पाई जाती है।

इन स्थितियों के कारण सूजन आ जाती है जो आपकी नसों को संकुचित कर देती है और इससे नस दबने से दर्द होने लगता है। पोषक तत्वों की कमी और कमज़ोर स्वास्थ्य नस दबने के दर्द को और बढ़ा देते हैं। केस की गंभीरता के आधार पर यह स्थिति परिवर्तनीय (रिवर्सेबल) या अपरिवर्तनीय (इर्रेवेर्सिबल) हो सकती है।

नसों के दर्द और नसों की कमजोरी दूर करने का घरेलू इलाज 

सेंधा नमक : सेंधा नमक साधारण नमक से थोडा अलग होता है, सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट पाया जाता है, मैग्नीशियम सल्फेट होने वाले दर्द को कम करता है। थोडा सा सेंधा नमक,सूती यानि मुलायम कपडा, एक टब गुनगुना पानी।

लगभग 2-3 कप सेंधा नमक को लेके सूती कपडे में लपेट ले। उसके बाद तब के गुनगुने पानी में सेंधा नमक की पोटली डुबा दे, कुछ देर तक सेंधा नमक की पोटली को पानी में डुबाते रहे। फिर आप उस पानी से नहा ले। अगर सुविधा हो तो उसी पानी में बैठ जाए। इस उपाय को हर रोज़ करते रहे और ये उपाय जब तक करना है जब नसों का दर्द चला न जाए।

पुदीने का तेल : यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें। इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी। अक्सर पुदीना हमारे घरो में लगा होता है, उसी पुदीने से आप अपने दर्द को बड़ी आसानी से भगा सकते है, तो आएये जानते है कि आखिर कैसे पुदीने से हम अपने दर्द को भगा सकते है?

सबसे पहले पुदीने का तेल निकाल ले, या मार्किट से पुदीने का तेल ले आये। शरीर के दर्द वाली जगह पर आराम से पुदीने के तेल से मालिश करे। इससे आपको नसों के दर्द में बहुत लाभ होगा।

सरसो का तेल : सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।

सेब का सिरका : वैसे तो बहुत तरह के सिरके होते है, लेकिन सेब का सिरका दर्द की बीमारी के साथ-साथ और भी कई तरह की बीमारी को सही करता है, सेब के सिरका सूजन को भी ख़त्म कर देता है। तो आएये अब सेब के सिरके से अपने दर्द को दूर करने के नुस्खे को जानते है। एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच सिरके का रस डाले। दोनों को मिलाने के बाद पी ले। 2-3 हफ्तों तक इसी पिश्रण को पीये।

लेवेंडर का फूल : लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं।

बेर की गुठलियां : नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप बेर की गुठलियों के चूर्ण को गुड़ के साथ खाएं जिससे की नसों में मज़बूती आएगी और शरीर बलवान बन जाता है।

गाय का दूध : नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप गाय के दूध के साथ मक्खन, मिश्री भी खा सकते है, जिससे काफी हद तक नसों की कमजोरी में आराम मिलता है।

गाय का दूध और हल्दी का पाउडर या आम्बा हल्दी : एक गिलास दूध को गर्म करके उसमे हल्दी का पाउडर डालकर मिला ले। मिलाने के बाद पी ले, लेकिन दूध ज्यादा ठंडा न होने दे। इस नुस्खे को लगभग लगभग 15 दिन तक करना है।

किसमिस : किसमिस खाने की आदत डाल लें। यह शरीर में अन्य लाभ पहुंचाने के साथ ही नसों की कमजोरी का भी बेहतरीन इलाज है। पर हाँ इसका इस्तेमाल आप सर्दियों के मौसम में ही करने की कोशिश करें।

आयुर्वेदिक इलाज : अश्वगन्धा 100 ग्राम, सतावर 100 ग्राम, बाहीपत्र 100 ग्राम, इसबगोल की भूसी 100 ग्राम, तालमिश्री 400 ग्राम इस सबका एक मिश्रण बना ले और उस मिश्रण को सुबह व शाम को दूध के साथ लें। लगभग एक महीने के प्रयोग से ही शरीर की रक्त क्षमता बढ़ जाती है। और नशों में ताक़त आजाती है।

व्यायाम : यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।

भ्रस्तिका प्राणायाम : भ्रस्तिका प्राणायाम करने से भी नसों के रोगी को बहुत लाभ होता है। लाभ होता है इसलिए रोजाना यह प्राणायाम करें।

अनुलोम विलोम : अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी नसों में होने वाली दिक्कत को एक दम से दूर किया जा सकता है और बहुत दिनों तक करेंगे तो ये बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाएगी।

मसाज का सहारा : नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।

आइस और हीट का उपयोग करें : नस दबने से अक्सर सूजन आ जाती है और सूजन नस को और दबाती है। सूजन कम करने के लिए और प्रवाह को बढाने के लिए प्रभावित हिस्से पर आइस और हीट का उपयोग बारी-बारी से करें, इस विधि को हाइड्रोथेरेपी कहते हैं। दिन में 3-4 बार 15 मिनट के लिए आइस लगाने से सूजन को कम करने में मद मिलती है। इसके बाद, प्रभावित हिस्से पर सप्ताह में 4-5 रातों तक 1 घंटे हीट पैड लगाने पर लक्षणों में सुधार आता है।

प्रभावित हिस्से पर या तो स्टोर से ख़रीदे हुए आइस पैक को रखें या घर पर बनाये आइस पैक का उपयोग हल्के दबाव के साथ करें। हल्का दबाव प्रभावित हिस्से को ठंडक देने में मदद करेगा। अपनी स्किन और आइस पैक के बीच एक नर्म कपडा रखें जिससे ठण्ड से स्किन को नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसे 15 मिनट से ज्यादा देर उपयोग न करें अन्यथा रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है जिससे दर्द देर से ठीक होता है।

आइस पैक के उपयोग के बाद रक्त प्रवाह को बढाने के लिए हॉट वाटर बोतल या एक हीट पैड का उपयोग करें जिससे नसों को जल्दी ठीक करने में मदद मिल सकती है। एक घंटे से अधिक हीट का उपयोग न करें अन्यथा सूजन और बढ़ सकती है। आप गर्म पानी से स्नान कर सकते हैं या फिर प्रभावित हिस्से को गर्म पानी में डुबाकर रख सकते हैं जिससे प्रभावित हिस्से की मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त प्रवाह बढ़ जाता है।

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