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यह चूर्ण सभी रोगों में फायदेमंद है

  • अक्सर आप लोगों ने देखा होगा बहुत से लोगों को सर्दी, खांसी, जुखाम यह समस्याएं उन लोगों को ज्यादा होते हैं जिनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होता है। ऐसे लोग ज्यादातर बीमारियों की चपेट में बने ही रहते हैं।
  • ऐसे मे आप कोई भी दवाई खाएं इसका कोई फायदा आपको नहीं मिलने वाला। दवाई खाने से अच्छा है आप लोग अपने इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाएं। और जब आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत हो जाएगा । सर्दी खांसी जुकाम को तो भूल ही जाए, इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होने से आपको और भी बहुत सारी बीमारियों से बचाव होता है। 
  • आज हम आपको एक ऐसे चूर्ण के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप अपने इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बना सकते हैं। चलिए जानते हैं इस चूर्ण के बारे में। नीचे बताये गए लगभग सभी 25 चूर्ण आयुर्वेदिक स्टोर पर उपलब्ध है कृपया आप वहाँ से इनको ला सकते है। यह कई कंपनियों के द्वारा बनाये जाते है हम आपको कंपनियों का नाम नही बतायेंगे नही तो आप मे से ही कोई कहने लगेगा की आप कंपनियों का प्रचार करते है। 

इस चूर्ण को बनाने के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की जरूरत पड़ेगी।

  1. पुनर्नवा-50 ग्राम
  2. हल्दी-30 ग्राम
  3. गिलोय पाउडर-50 ग्राम
  4. नीम के पत्ते-30 ग्राम

इसको बनाने की विधि :

  • इनमें से हल्दी और नीम के पत्ते तो आपको घर पर ही मिल जाएंगे। मगर गिलोय पाउडर और पुनर्नवा आपको बाजार से खरीदना पड़ेगा। इन सभी औषधियों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर मिक्सी या पत्थर पर अच्छी तरह पीस लें। इसने के बाद इस औषधि को किसी कांच के जार में भरकर रख ले।

औषधि लेने का तरीका

  • सुबह खाली पेट खाना खाने से पहले एक चम्मच चूर्ण का गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इस चूर्ण का इस्तेमाल आप को दिन में केवल एक ही बार करना है। इस चूर्ण के नियम इस्तेमाल के बाद आपके शरीर की काया पलट हो जाएगी। आप जो भी खाएंगे आपके शरीर में लगेगा और अच्छे से पचेगा और बहुत सारी बीमारियों से बचाव भी करता है यह चूर्ण।

बहुत उपयोगी 24 आयुर्वेदिक चूर्ण और इनको सेवन करने का तरिका :
आयुर्वेद के कुछ महत्वपूर्ण व कारगर चूर्ण की जानकारी दी जा रही है, जरुरत के हिसाब से इन्हें घर पर रखिये, क्योंकि आपातकाल में अन्य परिस्तिथतियों में हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं।

  1. अश्वगन्धादि चूर्ण : दिमाग की कमजोरी, शारीरिक ताक़त, पौरुष कमज़ोरी ख़त्म करे, शक्तिवर्द्धक, बल-वर्द्धक, पौष्टिक तथा बाजीकर, शरीर की झुर्रियों को दूर करता है। मात्रा 5 से 10 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।
  2. अविपित्तकर चूर्ण : अम्लपित्त की सर्वोत्तम दवा। छाती और गले की जलन, खट्टी डकारें, कब्जियत आदि पित्त रोगों के सभी उपद्रव इससे शांत होते हैं। मात्रा 3 से 6 ग्राम पानी के साथ।
  3. आमलकी रसायन चूर्ण : पौष्टिक, पित्त नाशक व रसायन है। नियमित सेवन से शरीर व इन्द्रियां दृढ़ होती हैं। मात्रा 3 ग्राम प्रातः व सायं पानी के साथ।
  4. जातिफलादि चूर्ण : अतिसार, संग्रहणी, पेट में मरोड़, अरुचि, अपचन, मंदाग्नि, वात-कफ तथा सर्दी-जुकाम को नष्ट करता है। मात्रा 1.5 से 3 ग्राम शहद से।
  5. दाडिमाष्टक चूर्ण : स्वादिष्ट एवं रुचिवर्द्धक। अजीर्ण, अग्निमांद्य, अरुचि गुल्म, संग्रहणी, व गले के रोगों में। मात्रा 3 से 5 ग्राम भोजन के बाद। पानी से।
  6. चातुर्भद्र चूर्ण : बच्चों के सामान्य रोग, ज्वर, अपचन, उल्टी, अग्निमांद्य आदि पर गुणकारी। मात्रा 1 से 4 रत्ती दिन में तीन बार शहद से।
  7. चोपचिन्यादि चूर्ण : उपदंश, प्र-मेह, वातव्याधि, व्रण आदि पर। मात्रा 1 से 3 ग्राम प्रातः व सायं जल अथवा शहद से।
  8. पुष्यानुग चूर्ण : स्त्रियों के प्र-दर रोग की उत्तम दवा। सभी प्रकार के प्रदर, स्त्री रोग, रक्तातिसार, रजोदोष, बवासीर आदि में लाभकारी। मात्रा 2 से 3 ग्राम सुबह-शाम शहद अथवा चावल के पानी में।
  9. यवानिखांडव चूर्ण : रोचक, पाचक व स्वादिष्ट। अरुचि, मंदाग्नि, वमन, अतिसार, संग्रहणी आदि उदर रोगों पर गुणकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम।
  10. लवणभास्कर चूर्ण : यह स्वादिष्ट व पाचक है तथा आमाशय शोधक है। अजीर्ण, अरुचि, पेट के रोग, मंदाग्नि, खट्टी डकार आना, भूख कम लगना आदि अनेक रोगों में लाभकारी। कब्जियत मिटाता है और पतले दस्तों को बंद करता है। बवासीर, सूजन, शूल, श्वास, आमवात आदि में उपयोगी। मात्रा 3 से 6 ग्राम मठा (छाछ) या पानी से भोजन के पूर्व या पश्चात लें।
  11. लवांगादि चूर्ण : वात, पित्त व कफ नाशक, कंठ रोग, वमन, अग्निमांद्य, अरुचि में लाभदायक। स्त्रियों को गर्भावस्था में होने वाले विकार, जैसे जी मिचलाना, उल्टी, अरुचि आदि में फायदा करता है। हृदय रोग, खांसी, हिचकी, पीनस, अतिसार, श्वास, प्रमेह, संग्रहणी, आदि में लाभदायक। मात्रा 3 ग्राम सुबह-शाम शहद से।
  12. व्योषादि चूर्ण : श्वास, खांसी, जुकाम, नजला, पीनस में लाभदायक तथा आवाज साफ करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सायंकाल गुनगुने पानी से।
  13. शतावरी चूर्ण : इससे सभी सात धातुओं की वृद्धि होती है। शक्ति वर्द्धक, पौष्टिक, बाजीकर तथा बल वर्द्धक है। मात्रा 5 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।
  14. स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण (सुख विरेचन चूर्ण) : हल्का दस्तावर है। बिना तकलीफ के पेट साफ करता है। खून साफ करता है तथा नियमित व्यवहार से बवासीर में लाभकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम रात्रि सोते समय गर्म जल अथवा दूध से।
  15. सारस्वत चूर्ण : दिमाग के दोषों को दूर करता है। बुद्धि व स्मृति बढ़ाता है। अनिद्रा या कम निद्रा में लाभदायक। विद्यार्थियों एवं दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम। मात्रा 1 से 3 ग्राम सुबह शाम दूध से।
  16. सितोपलादि चूर्ण : पुराना बुखार, भूख न लगना, श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, अरुचि जीभ की शून्यता, हाथ-पैर की जलन, नाक व मुंह से खून आना, क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा। मात्रा 1 से 3 ग्राम सुबह-शाम शहाद से।
  17. महासुदर्शन चूर्ण : सब तरह का बुखार, इकतरा, दुजारी, तिजारी, मलेरिया, जीर्ण ज्वर, यकृत व प्लीहा के दोष से उत्पन्न होने वाले जीर्ण ज्वर, धातुगत ज्वर आदि में विशेष लाभकारी। कलेजे की जलन, प्यास, खांसी तथा पीठ, कमर, जांघ व पसवाडे के दर्द को दूर करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ।
  18. सैंधवादि चूर्ण : अग्निवर्द्धक, दीपन व पाचन। मात्रा 2 से 3 ग्राम प्रातः व सायंकाल पानी अथवा छाछ से।
  19. हिंग्वाष्टक चूर्ण : पेट की वायु को साफ करता है तथा अग्निवर्द्धक व पाचक है। अजीर्ण, मरोड़, ऐंठन, पेट में गुड़गुड़ाहट, पेट का फूलना, पेट का दर्द, भूख न लगना, वायु रुकना, दस्त साफ न होना, अपच के दस्त आदि में पेट के रोग नष्ट होते हैं तथा पाचन शक्ति ठीक काम करती है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।
  20. त्रिकटु चूर्ण : खांसी, कफ, वायु, शूल नाशक, व अग्निदीपक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम प्रातः-सायंकाल शहद से।
  21. त्रिफला चूर्ण : कब्ज, पांडू, कामला, सूजन, रक्त विकार, नेत्रविकार आदि रोगों को दूर करता है तथा रसायन है। पुरानी कब्जियत दूर करता है। इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। मात्रा 1 से 3 ग्राम घी व शहद से तथा कब्जियत के लिए 5 से 10 ग्राम रात्रि को जल के साथ।
  22. श्रृंग्यादि चूर्ण : बच्चों के श्वास, खांसी, अतिसार, ज्वर में। मात्रा 2 से 4 रत्ती प्रातः-सायंकाल शहद से।
  23. अग्निमुख चूर्ण : उदावर्त, अजीर्ण, उदर रोग, शूल, गुल्म व श्वास में लाभप्रद। अग्निदीपक तथा पाचक। मात्रा 3 ग्राम प्रातः-सायं गरम जल से।
  24. माजून मुलैयन : हाजमा करके दस्त साफ लाने के लिए प्रसिद्ध माजून है। बवासीर के मरीजों के लिए श्रेष्ठ दस्तावर दवा। मात्रा रात को सोते समय 10 ग्राम दूध के साथ।

Note – इन चूर्णों को अपनाने से पहले एक बार अपने नजदीकी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श जरूर कर ले।

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1 Comment

  1. May 21, 2019 / 12:31 am

    aapne bahut achii jankari mere sath share ki hai is janakri ko ddene ke liye dhanyabad

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