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ये 2 योग करते है थाइराइड को जड़ से ख़त्म, जानें और जानकारी आगे बढ़ाएं

  • थायराइड (Thyroid)की योग चिकित्सा के लिए आप सबसे पहले किसी जानकार योगाचार्य से सम्पर्क करे और कुछ दिन उनके सानिध्य में रह कर सभी प्रणायाम को सही तरीके से सीख ले फिर आप इसे स्वयं भी कर सकते है। यदि आप इन बताये गए प्रणायाम का विधिवत प्रयोग करते है तो यकीन जानिये कि थायरायड (Thyroid) से आपको अवश्य मुक्ति मिल जायेगी ये सभी प्राणायाम प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट ही करें।
  • थायराइड एक ऐसा रोग है, जो थायराइड ग्रंथि के कार्य को प्रभावित करता है। थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं – हाइपोथायरायडिज्म, जो पर्याप्त थायराइड हार्मोन न होने के कारण होता है और हाइपरथायरायडिज्म, जो बहुत अधिक थायराइड हार्मोन होने के कारण होता है। जब कोई व्यक्ति थायराइड से पीड़ित होता है तो उसे थकान, कम ऊर्जा, वजन कम होना, ठंड, हृदय गति में बदलाव, त्वचा का शुष्क होना और कब्ज भी हो सकती है। थायराइड रोग के इलाज के लिए किसी अच्छे चिकित्सक की सलाह जरूर लें लेकिन क्या आप जानते है, योग और मेडिटेशन से थायरॉयड से राहत मिल सकती है।

ये 2 योग करते है थाइराइड को जड़ से ख़त्म

1. सर्वसंगना :
यह थायरॉयड ग्रंथियों को उत्तेजित करता है और थायरॉक्सीन को नियंत्रित करता है। इस योग को करने से सिर में रक्त का प्रवाह संतुलित हो जाता है, जो थायराइड को कम करने में मदद करता है।

2. हलासन :
इस योग को करने से गर्दन पर दबाव पड़ता है, साथ ही इस योग को करने से पेट और थायराइड ग्रंथियां उत्तेजित होती हैं। यह योग तनाव और थकान को कम करने का काम करता है।

आप इन 10 अन्य योग का भी सहारा ले सकते है

  1. उज्जायी प्राणायाम : सबसे पहले आप पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें और अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि व् कम्पन उत्पन्न होने लगे-इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रति-दिन करें-
  2. नाड़ीशोधन प्राणायाम : कमर-गर्दन सीधी रखकर एक नाक से धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लेकर दूसरे स्वर से निकालें फिर उसी स्वर से श्वास लेकर दूसरी नाक से छोड़ें आप 10 बार यह प्रक्रिया करें.
  3. ध्यानयोग : इसमें आप आँखें बंद कर मन को सामान्य श्वास-प्रश्वास पर ध्यान करते हुए मन में श्वास भीतर आने पर ‘सो’ और श्वास बाहर निकालते समय ‘हम’ का विचार 5 से 10 मिनट करें।
  4. ब्रह्ममुद्रा : वज्रासन में या कमर सीधी रखकर बैठें और गर्दन को 10 बार ऊपर-नीचे चलाएँ- दाएँ-बाएँ 10 बार चलाएँ और 10 बार सीधे-उल्टे घुमाएँ।
  5. मांजरासन : चौपाये की तरह होकर गर्दन-कमर ऊपर-नीचे 10 बार चलाना चाहिए।
  6. उष्ट्रासन: घुटनों पर खड़े होकर पीछे झुकते हुए एड़ियों को दोनों हाथों से पकड़कर गर्दन पीछे झुकाएँ और पेट को आगे की तरफ उठाएँ इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें।
  7. शशकासन : वज्रासन में बैठकर सामने झुककर 10-15 बार श्वास -प्रश्वास करें।
  8. मत्स्यासन : वज्रासन या पद्मासन में बैठकर कोहनियों की मदद से पीछे झुककर गर्दन लटकाते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन से स्पर्श करें और 10-15 श्वास-प्रश्वास करें।
  9. सर्वांगासन : पीठ के बल लेटकर हाथों की मदद से पैर उठाते हुए शरीर को काँधों पर रोकें इस तरह 10-15 श्वास-प्रश्वास करें।
  10. भुजंगासन : पीठ के बल लेटकर हथेलियाँ कंधों के नीचे जमाकर नाभि तक उठाकर 10- 15 श्वास-प्रश्वास करें।

नोट- किसी योग्य योग शिक्षक से सभी आसन की जानकारी ले के ही करे।

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