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हिमाचल की ये सब्जी बिकती है 30 हज़ार रूपये प्रति किलो में इसकी खासियत जान दंग रह जाएंगे आप, ये दिल के मरीज़ों के लिए संजीवनी है

नमस्कार दोस्तों All Ayurvedic में आज हम आपको ऐसी जादुई सब्ज़ी के बारे में बताएँगे जो दिल के मरीज़ों के लिए संजीवनी है। आज तक आप लोगों ने 20 से 100 रूपए किलो की सब्जियां तो खाई होंगी। लेकिन क्या आप लोगों ने कभी 30000 रूपए प्रति किलो वाली सब्जी खाई है। जी हाँ, जिसकी अपनी एक अगल ही खासियत है। तो चलिए जानते हैं इस सब्जी और इसकी खासियत के बारे में।
छतरी, टटमोर, डुंघरू या गुच्छी। कितने ही नाम है इस अजूबे के, लेकिन इसका न सिर है न पैर। यह औषधिय गुणों से भरपूर होती है। इस औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छीशिमलाके जंगलों में लगती है। इसे ढूंढने के लिए यहां के ग्रामीण जगलों में जाते हैं। प्रकृति के खजाने के इस कीमती तोहफे को पाने के लिए ग्रामीणों में हर बार की तरह कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। गुच्छी की कीमत 25 से 30 हजार रु. किलो है।
इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए गुच्छी एक वरदान की तरह है। क्योंकि इससे यहां रहने वाले लोगों की अच्छी खासी कमाई हो जाती है। स्थानिय लोगों की माने तो गुच्छी पहाड़ों पर बिजली की गड़गड़ाहट व चमक के कारण बर्फ से निकलती है। बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है। इस सब्जी का इस्तेमाल लोग सर्दियोंमें करते हैं।  संतश्री ने बताया कि 1980 के सिंहस्थ में जूना अखाड़ा के एक महंत ने 45 लाख रुपए की गुच्छी की सब्जी का भंडारा सात दिन तक चलाया था।
आपकी जानकारी हेतु बता दें की इस सब्जी का नाम गुच्छी है। जो प्रति वर्ष बादलों द्वारा बिजली की गड़गड़ाहट से भारत में उगती है। साथ ही बाजारों में इसकी कीमत कम से कम 30000 रूपए प्रति किलो है। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस सब्जी को वैज्ञानिक नाम भी दिया गया है। जिसको विज्ञान की भाषा में मार्कुला एसक्वि पलेंटा कहा जाता है।
यह सब्जी हिमाचल और कश्मीर की पहाड़ियों में पाई जाती है। इस सब्जी की उत्पति पहाड़ों पर बिजली की गड़गड़ाहट के द्वारा बर्फ के पिघलने से होती है। जो प्रति वर्ष मार्च और अप्रैल महीने के बीच में उगती है। इसके साथ ही कई बड़े-बड़े होटल और कंपनियां इस सब्जी को हाथों – हाथ खरीद लेती हैं। क्योंकि इस सब्जी की मांग भारत सहित इटली, फ्रांस, अमेरिका जैसे देशों में बहुत ज्यादा है।
जंगलों में निकलने वाली एक अलग प्रकार की मशरूम प्रजाति को गुच्छी कहा जाता है। हल्की और काली मिट्टी में पेड़ों और झाड़ियों के बीच यह अधिक पैदा तोती है। अभी तक विशेषज्ञ गुच्छी को घरों और खेतों में तैयार नहीं कर सके हैं।
यूं तो यहसब्जी औषधीय गुणों से भरपूर है लेकिन इससे नियमित खाने से दिल की बिमारियां दूर हो जाती है। यह सब्जी हार्ट पेशेंट के लिए उपयोगी होती है।  गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा है, लेकिन इसे हिंदी में स्पंज मशरूम कहा जाता है। इस सब्जी के लिए जहां एक ओर लोगों में प्रतिस्पर्धा लगती है वहीं दूसरी ओर अमरीका, यूरोप, फ्रांस, इटली व स्विट्जरलैंड के लोग गुच्छी को खूब पसंद करते हैं। इसमें विटामिन-बी और डी के अलावा विटामिन-सी और विटामिन-के प्रचुर मात्रा में होता है। इन इलाकों में रहने वाले लोग सीजन के समय जंगलों में ही डेरा डालकर गुच्छी इकट्ठा करते हैं। इन लोगों से गुच्छी बड़ी कंपनियां 10 से 15 हजार रुपए प्रतिकिलो के हिसाब खरीद लेती हैं, जबकि बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है।
यह सब्जी दिल के मरीजों के लिए काफी फायदे मंद मानी जाती है। जिसके लिए डॉक्टर्स का कहना है की गुच्छी आपको दिल जैसे खतरनाक रोगों से दूर रखने में मदद करती है। क्योंकि इसमें बहुत ही ज्यादा मात्रा में विटामिन-बी पाया जाता है। इसीलिए इस सब्जी की आज बाजार में बहुत ही ज्यादा मांग है। लेकिन इसकी उत्पति बहुत ही कम हो पाती है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से उगती है।

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