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गठिया रोगी ध्यान दे, बस करे नमक का इस्तेमाल इस तरह और हो जाए गठिया से मुक्त, ये उपाय सिरदर्द में भी कारगर है

  • नमक के बिना सभी प्रकार के मसालों का स्वाद निरर्थक है अत: मसालों के स्वाद को बढ़ाने के लिए नमक का उपयोग किया जाता है। 
  • यह सभी प्रकार के रसों का केन्द्र माना जाता हैं क्योंकि इसके बिना सभी व्यंजन बेस्वाद पड़ जाते हैं। नमक को सब्जी में डाला जाता है, यदि नमक सब्जी में  न डाला जायें तो सब्जी में स्वाद नहीं आता है
  •  नमक की अनेक किस्मे होती हैं लेकिन मुख्य रूप से पांच प्रकार के नमक का उपयोग अधिक होता है। 

सामग्री:

  • नमक: 250 ग्राम

कैसे करे प्रयोग:

1) गठिया (जोड़ों का दर्द) :

  • 1 किलो गर्म पानी में 4 चम्मच नमक डालकर इस पानी से गठिया को धोएं इससे लाभ मिलेगा।
  • गठिया के रोग में कमजोरी के कारण होने वाले दर्द में सैंधानमक, सोया, देवदारू, पीपल, कालीमिर्च, चीता, बायबिडंग, अजमोद, पीपरामूल को 20-20 ग्राम लें और विधारा तथा सोंठ 200-200 ग्राम लें व 100 ग्राम हरड़ लेकर इन सबको कूट-पीस लें। फिर इस चूर्ण को छानकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद 680 ग्राम गुड़ को पानी में मिलाकर आग पर पकाकर चाशनी बना लें। चाशनी बन जाने के बाद प्राप्त चूर्ण को उसमें मिलाकर 4-4 ग्राम की गोलियां बना लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 1-1 गोली गर्म पानी के साथ लें।

2) सिर का दर्द :

  • 1 चुटकी भर पिसा हुआ नमक जीभ पर रखें और 10 मिनट के बाद 1 ठंड़ा गिलास पानी पीनें से सिर में दर्द ठीक हो जाता है।
  • चौथाई कप जल में 3 ग्राम नमक मिलाकर उस पानी को सूंघने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।
  • सनाय और नमक के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर सेवन करने से सिर दर्द में आराम मिलता है।
  • लगभग 10 ग्राम नमक को लगभग 1 किलोग्राम पानी में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
  • सिर में दर्द होने पर ठंड़े पानी में चुटकीभर नमक डालकर पीएं इससे लाभ मिलेगा।
  • लगभग 1.5 ग्राम लाहौरी नमक को 10 ग्राम पानी में मिलाकर नाक के नथुनों में डालने से सिर का दर्द और आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।

किन बातों का रखे ख्याल:

  • नमक का ज्यादा सेवन करने से पाचन क्रिया, खून, मांस और धातुओं तथा वात नाड़ियों (नसों) में दोष उत्पन्न होता है। 
  • इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आमाशय और शरीर के अन्य अंगों में जलन उत्पन्न होती है। उच्च रक्तचाप, गुर्दे के रोग, हिस्टीरिया, मिर्गी, जलोदर (पेट में पानी भरना), सूजन, चेचक, खुजली, कोढ़ और रक्तदोष के रोग (खून में खराबी के कारण उत्पन्न रोग) से पीड़ित रोगी को नमक का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें हानि हो सकती है। 
  • यह मांस की गांठों को फोड़ने तथा कुरेदने वाला, इन्द्रियों को कमजोर बनाकर काम शक्ति को कम करने वाला व शरीर वृद्ध बनाने वाला होता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बाल सफेद व झड़ने लगते हैं।

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