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हरी मिर्च जितनी तीखी शरीर के लिए है उतनी ही मलेरिया जैसी बिमारी के लिए भी, ऐसे करे इसका उपयोग

हरी मिर्च लगभग पूरे भारत में पाई जाती है। खास तौर पर ये पश्चिमी क्षेत्र में होती है। यह कई किस्मों में होती है। इसका पौधा गेंदे के पौधे की तरह छोटा सा होता है, इसमे उंगलियों के समान फल लगते हैं जो `मिर्च´ कहलाती है। हरी मिर्च की पत्तियों का रंग हरा, फल हरा व फूल सफेद रंग के होते हैं। हरी मिर्च का स्वाद तीखा (तीता) होता है। हरी मिर्च गर्म होती है।

विभिन्न रोगों में उपयोग : 

  1. मलेरिया का बुखार: एक हरी मिर्च के बीज को निकालकर बुखार आने के दो घंटे पहले अंगूठे में पहनाकर बांध दें। इसी प्रकार दो से तीन बार बांधने से मलेरिया बुखार आना बंद हो जाता है। हरी मिर्च बांधने से जलन होती है। ध्यान रहे कि जितनी देर तक सहन हो सके इसे उतनी देर तक ही बांधें।
  2. गठिया रोग: गठिया के दर्द को दूर करने के लिए लाल या हरी मिर्च को डंठल सहित पीसकर लेप बनाकर लेप करें।
  3. आग से जलने पर: शरीर के जले हुए भाग पर हरीमिर्च को पानी में पीसकर लेप करने से आराम आता है।

ध्यान रखे :

हरी मिर्च का अधिक मात्रा में उपयोग मसाने, फेफडे़ और आमाशय के लिए हानिकारक होता है।

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