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पेट दर्द है तो इसको बेपरवाह ना करें ये विभिन्न रोगों कि और इशारा कर सकता है

पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं, दायीं तरफ बायीं तरफ या मध्य में दर्द, ये अलग अलग कारणों से होता है, जिनमे गाल ब्लैडर स्टोन, पेप्टिक अलसर, पेनक्रिएटाइटिस, कब्ज, बदहजमी, सीने में जलन, मुंह में खट्टा पानी आना, अपेंडिक्स इत्यादि हैं, लेकिन अक्सर हम पेट दर्द कि सही वजह नहीं जान पाते, आज हम आपको इन कुछ वजहों के बारे में बताएँगे, जिन से आप जान पाएंगे के ये दर्द किस कारण से हो सकता है. www.allayurvedic.org

पेट के दायें हिस्से में दर्द

पेट के दायें हिस्से में लीवर के नीचे गाल ब्लैडर होता है, जो लीवर से निकले हुए पित्त का भण्डारण करता है, यहाँ पर दर्द गाल ब्लैडर में स्टोन कि वजह के कारण हो सकता है, ऐसे दर्द में डॉक्टर्स ऑपरेशन कि सलाह ही देते हैं, क्यूंकि उनके पास इस स्टोन को निकालने का कोई भी रास्ता नहीं है, मगर आप आयुर्वेद की मदद द्वारा ये निकाल सकते हैं

पेट के दायें हिस्से में नीचे की और दर्द

पेट के दायें हिस्से में नीचे की और दर्द अपेंडिक्स कि वजह से हो सकता है, अधिक तला भुना खाने से या आंतो कि अच्छे से सफाई ना होने से आंतो के आखरी हिस्से में मल विषाक्त पदार्थ जमा होते रहने से अपेंडिक्स प्रभावित होती है, और डॉक्टर्स इसको भी काटने कि ही राय देते हैं, ऐसे में आप आयुर्वेद कि सहायता से इसका इलाज कर सकते हैं

पेट के बीच में दर्द

पेट के बीच में दर्द अल्सर का संकेत है, यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन या पेन किलर का सेवन करने के कारण होता है, अगर पेप्टिक अल्सर का दर्द हो तो तुरंत आप छाछ या दूध कि लस्सी कर के पियें तो तुरंत आराम मिलेगा, इसके लिए आप एक चौथाई दूध में तीन चौथाई पानी मिला कर इसको अच्छे से मथ लीजिये तो ये दूध कि लस्सी बन जाएगी, अल्सर के रोगियों के लिए यह अमृत समान है

पेट के बीच से पीठ तक होता हुआ दर्द

यह दर्द पेनक्रिएटाइटिस होने कि और इशारा करता है, यह अधिक शराब पीने से होता है, शराब का नियमित सेवन करने से पैंक्रियास (अग्नाशय) प्रभावित होता है, इस से बचने के लिए अल्कोहल से दूरी रखें और शरीर में पानी कि कमी ना होने दें

पेट दर्द, मल सख्त होने के साथ पेट का साफ़ ना होना

यह कब्ज के लक्षण हैं, अधिक तला भुना, मसालेदार खाना, कोल्ड ड्रिंक्स, अधिक भोजन और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं, ऐसे में फाइबर वाले भोजन अधिक सेवन करने चाहिए, दही छाछ में अजवायन और जीरा का तड़का लगा कर खाएं

बदहजमी, सीने में जलन, मुंह में खट्टा पानी आना

इन समस्याओं का कारण एसिडिटी होता हैं, जब हम भोजन करते हैं तो इसको पचाने के लिए लीवर कुछ एसिड का स्त्राव करता है जो भोजन में पचाने में अति सहायक होते हैं, कई बार ये एसिड अधिक मात्रा में बनते है, परिणामस्वरूप सीने में जलन या मुंह में खट्टा पानी आ जाना ऐसे लक्षण प्रतीत होते हैं. ऐसे मरीजो को जिनको मुंह में खट्टा पानी अधिक आता हो उनको रात्रि को गरिष्ठ भोजन नहीं लेना चाहिए, फलों में सेब संतरा केला ज़रूर खाएं. अगर आप को एसिडिटी या हाइपर एसिडिटी हो गयी हो तो आप आधा चम्मच जीरा कच्चा ही चबा चबा कर खा लीजिये, और ऊपर से आधा गिलास साधारण जल पी लीजिये, आपको तुरंत आराम आ जायेगा

पेट के उपरी हिस्से में खिंचाव के साथ फूलना

यह समस्या गैस के कारण हो सकती है, ऐसी स्थिति में चाय, कॉफ़ी, मिर्च, तला भुना खाना, खटाई वाली चीजें ना खाएं. नमक कम लें, खाने के साथ पानी ना पियें



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