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गठिया का उपचार

गठिया
या संधिबात
का की सबसे अछि दावा है मेथी, हल्दी और सुखा हुआ अदरक माने
सोंठ
, इन तीनो को बराबर मात्रा में पिस कर, इनका पावडर बनाके 
एक
चम्मच लेना गरम पानी के साथ सुभाह खाली पेट तो इससे घुटनों का दर्द ठीक
होता है, कमर का दर्द ठीक होता है, देड़ दो महिना ले सकता है ।

और एक अछि दावा है , एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हरसिंगार कहते है,
संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे
छोटे सफ़ेद फूल आते है, और्फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे
खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है । इस
पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस के चटनी बनाइये और एक ग्लास
पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके पियो तो बीस
बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है । और येही पत्ते को पिस
के गरम पानी में डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी
दावा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है ; जैसे चिकनगुनिया का बुखार,
डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया,
ये सभी ठीक होते है ।

बुखार की और एक अछि दावा है अपने घर में तुलसी पत्ता ; दस पन्दरा तुलसी
पत्ता तोड़ो, तिन चार काली मिर्च
ले लो पत्थर में पिस के एक ग्लास गरम पानी
में मिलके पी लो .. इससे भी बुखार ठीक होता है ।

बुखार की एक और दावा है नीम की गिलोय, अमृता भी कहते है, उडूनची भी कहते
है
, इसको थोडासा चाकू से काट लो , पत्थर में कुचल के पानी में उबाल लो फिर
वो पानी पी लेना तो ख़राब से ख़राब बुखार ठीक हो जाता है तिन दिन में । कभी
कभी बुखार जब बहुत जादा हो जाते है तब खून में सेत रक्त कनिकाएं ,
प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाते है तब उसमे सबसे जादा काम आती है ये गिलोय।

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