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अदरक और शहद मिश्रण के फायदे


  • अगर आपको सर्दी के मौसम में जुखाम बुखार होने पर आपको खांसी का होना लाजमी है। बुख़ार से निजात पाने के लिए आप अंग्रेजी दवाइयों का सेवन करते हैं। उन दवाइयों से आप की बुखार हुए खांसी तो मिट जाती हैं। लेकिन सबसे बड़ी प्रॉब्लम आपके गले में होने वाली खसखस से परेशान रहने लगते हो। इसलिए इसको खत्म करने के लिए आप शहद और अदरक का इस्तेमाल करें।
  • भारत में अदरक और शहद लगभग हर घर में पाए जाते हैं। अदरक का उपयोग हम चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं। इसके अलावा अदरक का उपयोग सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता हैं। लेकिन हम यह नही जानते की अगर शहद और अदरक के मिश्रण का सेवन किया जाए तो यह एक औषधि के रूप में काम करता हैं। इसके लिए एक छोटा पिस अदरक को पीसकर और शहद में मिलाकर मिश्रण बनाना हैं। सिर्फ 7 दिन अदरक और शहद के मिश्रण का सेवन करने से मिलते हैं चौंकाने वाले परिणाम
अदरक और शहद के मिश्रण से होने वाले फायदे 
  1. कब्ज की समस्या को दूर करता हैं : आज के दिन भारत में हर तीसरा आदमी कब्ज की समस्या से परेशान हैं। लेकिन हम यह नही जानते की अगर रोज सुबह खाली पेट अदरक और शहद के मिश्रण का सेवन किया जाए तो कब्ज की समस्या हमेसा के लिए दूर हो जाती हैं। सात दिन खाली पेट इसके सेवन से हमे फर्क महसूस होने लगेगा।
  2. ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक : अदरक और शहद के मिश्रण का सेवन करने से ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता हैं। क्यूंकि अदरक और शहद में सोडियम और पोटैशियम की मात्रा बहुत कम होती है, जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर नियंत्रित बना रहता है। हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत वालों को इसका सेवन नयमित रूप से करना चाहिए।
  3. अस्थमा की समस्या छुटकारा : अगर किसीको अस्थमा की शिकायत है तो यह उसके लिए यह मिश्रण रामबाण इलाज हैं इसके लिए अदरक और शहद के साथ साथ काली मिर्च से बने जूस का सेवन करने से अस्थमा से राहत मिल जाती हैं। क्यूंकि इस जूस में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होता हैं जिससे यह फेफड़ों में ऑक्सीजन की सप्लाई को बढ़ा देता है और अस्थमा से आराम मिलता है।
  4. खांसी से पाए छुटकारा : अदरक का रस निकालकर उसको शहद में मिलाकर गर्म करें करने के पश्चात उसे थोड़ा ठंडा कर ले और वह भी कम से कम 5, 5 ग्राम की मात्रा में होने चाहिए। और बने हुए उस मिश्रण को चम्मच से चाट ले और 2 दिन के बाद आप की खसखस या खांसी जड़ से खत्म हो जाएगी।
  5. कान में आवाज होना : लगभग 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 ग्राम शहद, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक और 3 ग्राम तिल के तेल को एक साथ मिलाकर रोजाना 2-3 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द, कानों में अजीब सी आवाजे सुनाई देना और कानों से सुनाई न देना (बहरापन) आदि रोग दूर हो जाते हैं।
  6. हृदय रोग : अदरक का रस तथा शहद, दोनों को मिलाकर नित्य उंगली से धीरे-धीरे चाटें। दोनों की मात्रा आधा-आधा चम्मच होनी चाहिए। इससे हृदय रोग में लाभ मिलता है। 
अदरक के फायदे :
  1. बालों के रोग : अदरक और प्याज का रस सेंधानमक के साथ मिलाकर गंजे सिर पर मालिश करें, इससे गंजेपन से राहत मिलती है।
  2. हाथ-पैर सुन्न हो जाना : सोंठ और लहसुन की एक-एक गांठ में पानी डालकर पीस लें तथा प्रभावित अंग पर इसका लेप करें। सुबह खाली पेट जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो कली प्रतिदिन 10 दिनों तक चबाएं।
  3. नजला, नया जुकाम : सौंठ और गुड़ पानी में डालकर उबाल लें। जब चौथाई रह जाए तब सुहाता-सुहाता छानकर पी जाएं। गले में ठंडक और खराश होने पर अदरक चूसें अथवा अदरक के छोट-छोटे टुकड़े, अजवायन, दाना मेथी और हल्दी प्रत्येक आधा-आधा चम्मच भरकर एक गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी शेष रह जाए तब स्वादानुसार जरा-सा गुड़ मिलाकर छानकर रात को सोते समय यह काढ़ा पी कर सो जाएं।
  4. कब्ज : अदरक का रस 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है। और यदि एक कप पानी में एक चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। छानकर पीने से कब्ज नहीं रहती है।
  5. सफेद दाग : 30 मिलीलीटर अदरक का रस और 15 ग्राम बावची को एक साथ मिलाकर और भिगोकर रख दें। जब अदरक का रस और बावची दोनों सूख जायें तो इन दोनों के बराबर लगभग 45 ग्राम चीनी को मिलाकर पीस लें। अब इसकी एक चम्मच की फंकी को ठंडे पानी से रोजाना 1 बार खाना खाने के एक घंटे के बाद लें।
  6. सिर का दर्द : अदरक के रस और दूध को बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। या अदरक का रस, गुड़, सेंधानमक और पीपल को एक साथ घिस लें और पानी के साथ सूंघने से सिर की सभी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
  7. मस्सा और तिल : अदरक के एक छोटे से टुकड़े को काटकर छील लें और उसकी नोक बना लें। फिर मस्से पर थोड़ा सा चूना लगाकर अदरक की नोक से धीरे-धीरे घिसने से मस्सा बिना किसी आप्रेशन के कट जायेगा और त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पडे़गा। बस शुरू में थोड़ी सी सूजन आयेगी।
  8. गठिया : 10 ग्राम सोंठ 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।
  9. जोड़ों का दर्द : अदरक के एक किलोग्राम रस में 500 मिलीलीटर तिल का तेल डालकर आग पर पकाना चाहिए, जब रस जलकर तेल मात्र रह जाये, तब उतारकर छान लेना चाहिए। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है।
  10. दमा : लगभग एक ग्राम अदरक के रस को एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लेने से दमा और श्वास रोग ठीक हो जाते हैं। 
  11. बवासीर : अदरक 500 ग्राम और पीपल 250 ग्राम को मिलाकर पेस्ट बनाकर इसे 500 ग्राम घी में पकायें। कालीमिर्च, चाव-चितावर, नाग केसर, पीपलामूल, इलायची, अजमोद, कालाजीरा और हर्रे। सब थोड़े-थोड़े से बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें। अदरक और पीपल से बने पेस्ट को इस चूर्ण के साथ मिलाकर इसमें 1 किलो गुड़ की चासनी बनाकर डालें। गुड़ और बाकी पेस्ट से बने गाढ़े चासनी को 60 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पाक बवासीर, कामला, अरुचि और मंदाग्नि बवासीर ठीक होता है।
  12. एलर्जी : अदरक के रस में थोड़ा-सा जीरा तथा पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करने से एलर्जी के रोग में लाभ होता है।
  13. जुकाम : 10 ग्राम अदरक को 10 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके रोजाना रात को सोते समय खाने से बार-बार जुकाम होने का रोग ठीक हो जाता है। इसको खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए।
  14. पेट के सभी प्रकार के रोग : पिसी हुई सोंठ एक ग्राम, जरा-सा हींग और सेंधानमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ फंकी के रूप में सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
  15. हाजमे की खराबी : अदरक का रस आधा चम्मच, सेंधानमक 1 चुटकी और नींबू का आधा चम्मच रस को मिलाकर सुबह और शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से हाजमे की खराबी में लाभ होता है।
  16. बहरापन : अदरक का रस हल्का गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरापन नष्ट होता है।
  17. कान का दर्द : कान में मैल जमने के कारण, सर्दी लगने के कारण, फुंसियां निकलने के कारण या चोट लगने के कारण कान में दर्द हो रहा हो तो अदरक के रस को कपड़े में छानकर हल्का सा गर्म करके 3-4 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। अगर पहली बार डालने से दर्द नहीं जाता तो इसे दुबारा डाल सकते हैं।
  18. कमर दर्द : 10 मिलीलीटर अदरक के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कमर दर्द में लाभ करता है।
  19. मासिक-धर्म की अनियमितता : अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सेवन करने से रुका हुआ मासिक धर्म नियमित रूप से आना शुरू हो जाता है।
  20. गुर्दे के रोग : अदरक का रस 10 मिलीलीटर में हींग भूनी लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पीसकर नमक मिलाकर पीयें।
  21. दस्त : रात को सोने से पहले अदरक को पानी में डाल दें, सुबह इसे निकालकर साफ पानी के साथ पीसकर घोल बनाकर 1 दिन में 3 से 4 बार पीने से अतिसार (दस्त) समाप्त हो जाता है।
  22. मसूढ़ों से खून आना : मसूढ़े में सूजन हो या मसूढ़ों से खून निकल रहा हो तो अदरक का रस निकालकर इसमें नमक मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे खून का निकलना बंद हो जाता है।
  23. निमोनिया : एक-एक चम्मच अदरक और तुलसी का रस शहद के साथ देने ये निमोनिया का रोग दूर होता है।
  24. गैस का बनना : अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसा हुआ गुड़ के साथ सेवन करने से अफारा या पेट की गैस को समाप्त करता है।
  25. सर्दी, जुकाम और खांसी : अदरक की चाय जुखाम, खांसी, और सर्दी के दिनों में बहुत लाभप्रद है। तीन ग्राम अदरक और 10 ग्राम गुड़ दोनों को पाव भर पानी में उबालें, 50 मिलीलीटर शेष रह जाने पर छान लें और थोड़ा गर्म-गर्म ही पीकर कंबल ओढ़कर सो जायें।
  26. आधे सिर का दर्द, गर्दन का दर्द, मांसपेशियों का दर्द : यदि उपरोक्त कष्ट अपच, पेट की गड़बड़ी से उत्पन्न हुए हो तो सोंठ को पीसकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर लुग्दी बनाकर तथा हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें। इस प्रयोग से आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है, बाद में शाघ्र ही ठीक हो जाएगा। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप करें। पिसी हुई सौंठ को सूंघने से छीके आकर भी सिरदर्द दूर हो जाता है।
  27. हिचकी : अदरक के बारीक टुकड़े को चूसने से हिचकी जल्द बंद हो जाती है। घी या पानी में सेंधानमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।
  28. पेट दर्द : अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर उस पर कालीमिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
किन्हे अदरक का सेवन करने से परहेज़ करना चाहिए :
  •  अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव, ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। 
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