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हमारे आसपास ही पाये जाने वाले इस पौधे की दो पत्तियां ही हैं हर बीमारी का रामबाण इलाज


  • कभी -कभी हम हमारे आसपास खड़े पौधों को पहचान नहीं पातें हैं। इनका प्रयोग भी करते हैं। मगर हम इनके औषधीय गुणों को नहीं जान पातें। इनसे हमें कभी -कभी बहुत बड़ा फ़ायदा होता है। आज हम आपको मेहंदी के औषधीय गुणों के बारे में बताएँगे। जिसका उपयोग हम सिर्फ हाथों पर रचाने के लिए करते हैं, वह इतनी उपयोगी हो सकती है आप सोच भी नहीं सकते। चलिए हम बताते हैं मेहंदी के सिर्फ कुछ पत्तों का कमाल। मेंहदी मानव स्वास्थ्य को बनाये रखती है। यदि आप सिर दर्द से परेशान हैं तो मेंहदी की पत्तियों को पीसकर उनका सिर पर लेप करने से जल्दी आराम मिलता है। मेंहदी के पेड़ सदाबहार झाड़ियों के रूप में पाये जाते हैं। महिलाएं इसका प्रयोग श्रृंगार शोभा को बढ़ाने के लिए करती हैं। यही कारण है कि यह बहुत विश्वसनीय है।
  • मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया पाउडर बाजार में कम कीमत पर आसानी से आकर्षक पैक में मिलती है। मेंहदी के पेड़ की पत्तियां हरे रंग की होती हैं, इसे पीसकर त्वचा पर लगाने से लाल रंग का निखार कई दिनों तक रहता है। इसका स्वाद कषैला होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। यह बालों में चमक के साथ-साथ दिमाग को शांत रखती है।मेंहदी का प्रयोग केवल बालों को सुदंर बनाने के लिए ही नहीं किया जाता है, बल्कि इसका प्रयोग विभिन्न रोगों के इलाज में किया जाता है। खून के विकार, उल्टी, कब्ज, कफ-पित्त, कुष्ठ (कोढ़), बुखार,जलन, रक्तपित्त, पेशाब करने में कठिनाई होना(मूत्रकृच्छ) तथा खुजली आदि रोगों में मेंहदी काफी लाभकारी है।
  • उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति के पैरों के तलुवों और हथेलियों पर मेंहदी का लेप समय-समय पर करने से आराम मिलता है। मेंहदी लगाने से शरीर की बढ़ी हुई गर्मी बाहर निकल जाती है। रात के समय मेंहदी को साफ पानी में भिगो दें और सवेरे के समय छानकर पीयें। इसके पीने से खून की सफाई होने के साथ-साथ शरीर के अन्दर की गर्मी भी शांत हो जाती है। 

मेहंदी के 46 चमत्कारी फ़ायदे :
  1. घुटनों के दर्द : मेहंदी को रात में भिगो कर रख दे और सुबह इसको छानकर पीने से हर तरह का खून साफ़ हो जाता है और आप पुनः स्वस्थ हो जायेंगे। मेहंदी और अरंडी के बराबर मात्रा में लेकर इसे पीस लें और इसे किसी भी प्रकार के घुटनों के दर्द के लिए इसका लेप करें। कुछ ही दिनों में आपके घुटनों का दर्द ख़त्म हो जाएगा।
  2. सिर दर्द और माइग्रेन : अगर आपको सिर दर्द और माइग्रेन की समस्या है तो आप मेहंदी को पीस कर सिर पर लगायें। आपको तुरंत लाभ मिलेगा। अगर आपके शरीर का कोई भी भाग जल गया है, तो के पत्तों या छाल को पीस कर उसका लेप लगायें आपका घाव बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा और दर्द से भी राहत मिलेगी। अगर आप घने और काले बाल चाहते हैं तो मेंहदी में नमक ,आंवला ,मेथी पाउडर को मिलाकर घोल तैयार करें और अपने बालों पर दो घंटे तक लगाएं। हाथ और पैर के तलवों पर मेहंदी लगाने से गर्मीं में बहुत राहत मिलती है।
  3. किडनी की पथरी : अगर आपके शरीर में ज्यादा गर्मीं बनी रहती है या ज्यादा गर्मीं लगती है तो मेहंदी के कुछ पत्तों को शाम को तोड़ लें और साफ पानी से धो लें ,फिर इसे रात भर पानी में भीगने दें। सुबह उठकर इस पानी को पी लें, इससे गर्मीं में बहुत राहत मिलती है। मेहंदी का काढा बनाकर पीने से कैसा भी चर्म रोग हो ख़त्म हो जाता है। मेहंदी के पत्तों को चबाने से मुंह की छाले ठीक हो जातें हैं। अगर आपको किडनी की पथरी की समस्या है तो आप आधा लीटर पानी में 500 ग्राम मेंहंदी के पत्तों को मिलाकर उबाले और जब पानी आधा रह जाय तब इसे पी लें। आपकी किडनी की पथरी निकल जायेगी।
  4. मुंह के छाले: मेंहदी के 20 ग्राम पत्तों को रात को सोते समय पानी में भिगोकर रखें। सुबह उस पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले नष्ट होते हैं। मेंहदी के पत्तों को मुंह में रखकर चबाने से मुंह के छाले मिट जाते हैं।
  5. फोड़े-फुन्सी: मेंहदी के पत्तों को उबालकर उसके पानी से पीड़ित अंग को धोने से फोड़े-फुन्सी में लाभ मिलता है।
  6. फोड़े पर मेंहदी के पत्तों को बांधने से फोड़े जल्दी ठीक हो जाते हैं।
  7. मसूढ़ों से खून आना: मसूढ़ों से खून निकलने तथा मसूढ़े सूज जाने पर मेंहदी के पत्तों को पानी के साथ उबाल लें। इस गर्म पानी से रोजाना 3 से 4 बार कुल्ला करने से मसूढ़ों से खून का निकलना बंद होता है तथा सूजन भी दूर हो जाती है।
  8. पैरों के तलुवों में जलन: गर्मी के दिनों में पैरों के तलुवों में निरन्तर होने वाली जलन पर इसका लेप लगाने से लाभ मिलता है।
  9. पैरों की उंगुलियां गलना: यदि पैरों की उंगुलियां गलती हो तो सरसों का तेल लगाकर मेंहदी छिड़कने से आराम मिलता है। पानी में काम करने से यदि उंगुलियां गल गई हो तो 1 चम्मच मेंहदी और आधा चम्मच हल्दी को मिलाकर रोजाना 2 बार लगाने से लाभ होता है। हाथ फटने पर, घाव होने पर लेप करने से लाभ मिलता है। शरीर का कोई भाग यदि गलने लगे तो मेंहदी का प्रयोग काफी लाभकारी होता है।
  10. बाल काले करना: 50 ग्राम मेंहदी, आधा चम्मच कांफी, 25 ग्राम आंवले एक साथ बारीक पीसकर दूध में भिगोकर बालों में लगा लें। फिर 1 घंटे के बाद पानी से सिर धोयें, सप्ताह में 2 बार ऐसा करने से सफेद बाल काले-सुनहरे हो जाते हैं। मेंहदी के पत्तों का चूर्ण और नील के पत्तों का चूर्ण बराबर लेकर लेप बना लें। इस लेप को सफेद बालों पर लगाने से बाल पूरी तरह से काले हो जाते हैं।
  11. मिर्गी: 2 कप दूध में चौथाई कप मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर रोजाना सुबह खाना खाने से 2 घंटे बाद कुछ सप्ताह तक लगातार देने मिर्गी के रोगी को लाभ होता है। लगभग 60 ग्राम मेंहदी के पत्तों के रस को 250 मिलीलीटर दूध के साथ मिलाकर पीने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
  12. पैरों की एड़ियों के फटने पर: बरसात व सर्दी के दिनों में पैरों की एड़ियों के फट जाने पर नियमित रूप से मेंहदी लगाने से पैर ठीक हो जाते हैं। 10 ग्राम मेंहदी के पत्ते को 1 गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।
  13. थकान: दौड़ने वाले युवकों, क्रिकेट आदि खेल खेलने खिलाड़ी आदि को अपने पैरों के तलुवों पर मेंहदी लगाने से थकान भी कम होती है और ठंडक भी मिलती है।
  14. उच्च रक्तचाप: हथेलियों और पैरों के तलुवों पर मेंहदी लगाने से उच्चरक्तचाप के रोग में लाभ होता है।
  15. पीलिया: मेंहदी के सूखे पत्तों को 1 गिलास पानी में मिलाकर रात को भिगो दें, सुबह इसे छानकर रोजाना एक बार पीने से पीलिया का रोग ठीक हो जाता है। 50 ग्राम मेंहदी को पीसकर आधा गिलास पानी में रात को भिगो दें। सुबह इसके पानी को पीने से 8 से 10 दिनों में ही पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।
  16. बालों का झड़ना: मेंहदी और चुकन्दर के पत्तों की चटनी बनाकर सिर में लगाने से बालों का गिरना बंद हो जाता है तथा नये बाल भी आ जाते हैं।
  17. त्वचा के काले दाग: मेंहदी और साबुन को बराबर मात्रा में मिलाकर उसका लेप बनायें, उसे काले दाग पर लगा लें। इससे कुछ ही दिनों में दाग नष्ट हो जाएगा।
  18. जोड़ों का दर्द : मेंहदी के हरे पत्तों के 100 मिलीलीटर रस को तिल के 100 मिलीलीटर तेल में मिलाकर उबालें, जब तेल शेष बचे तो इसे ठंडा करके छान लें और जोड़ों का दर्द (आमवात), साइटिका दर्द और कमर दर्द होने पर गर्म करके 2 बार मालिश करें। मालिश करने के आधे घंटे बाद सिंकाई करने से लाभ मिलता है।            
  19. कटे हुए घाव: कटे हुए घाव पर मेंहदी लगाने से आश्चर्यजनक लाभ होता है। इससे कुछ ही दिनों में पूरा घाव भर जाता है।
  20. खुरदरापन: हाथों में होने वाले खुरदरेपन को ठीक करने के लिए अपने हाथों में मेंहदी और नींबू के रस को मिलाकर लगाने से हाथ मुलायम हो जाते हैं। इसी प्रकार यदि आपके पैरों में खुरदरापन आ जाए तो पिसी हुई मेंहदी का लेप कर लें, सूख जाने पर मेंहदी को हटा दें और सरसों का तेल लगायें। इससे हाथों का खुरदरापन ठीक हो जाता है।
  21. एलर्जी: रात को 1 गिलास साफ पानी में 100 मेंहदी के सूखे पत्ते भिगो दें, सुबह इस पानी को छानकर पीने से शरीर में शीतलता (ठंडक) के साथ-साथ खून भी साफ हो जाता है। एलर्जी वाले रोगियों के लिए यह बड़ी गुणकारी चिकित्सा है।
  22. सूजन: मेंहदी के पत्तों का लेप पीड़ित अंग पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।
  23.  सिर की जलन: 4 ग्राम मेंहदी और 3 ग्राम कतीरे को रात में पानी में भिगो दें इसे सुबह उठकर मिश्री के साथ लेने से सिर की जलन में लाभ होता है। 
  24. सिर का चकराना: मेंहदी के 3 ग्राम बीजों को शहद के साथ चाटने से लाभ होता है, इसी प्रकार फूलों का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से सिर चकराने के रोग में फायदा होता है। दवा खाने के तुरन्त बाद ही गेहूं की रोटी, खंड और घी को साथ मिलाकर खाने से सिर का चकराने के रोग में लाभ मिलता है।
  25. अनिद्रा (नींद का कम आना): वह व्यक्ति जिन्हें नींद कम आती हो उन्हें अपने सोते समय तकिये में मेंहदी के सूखे फूलों को भरकर सिरहाने पर रखना चाहिए। इससे अच्छी नींद आती है।
  26. सौन्दर्य प्रसाधन: आम की छाल, दाड़िम के पुष्पों की कली, मेंहदी और हरड़ के चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर एक साथ पीस-छानकर त्वचा पर लगाने से सौन्दर्य में निखर आता है और त्वचा के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
  27. नकसीर: मुल्तानी मिट्टी, जौ का आटा, मेंहदी तथा धनिया को बराबर लेकर पीसकर लेप बना लें। इस लेप को नाक पर लगाकर ऊपर से मलमल का कपड़ा पानी में भिगोकर रखें। इससे नकसीर के रोगी को लाभ मिलता है। पैरों के तलवों पर मेंहदी लगाने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।
  28. आंखों की लाली के लिए: 10 ग्राम जीरा और 10 ग्राम मेंहदी को बराबर मात्रा में पीसकर रात में गुलाब जल में भिगो दें। इसे सुबह-सुबह छानकर साफ शीशी में रख लें और इसमें 1 ग्राम भुनी हुई फिटकरी बारीक पीसकर मिला लें इसे थोड़ी मात्रा में डालने से आंखों का लालपन दूर हो जाता है। मेंहदी के हरे पत्तों को पीसकर लेप बना लें, रात में इसकी टिकिया को आंख पर बांधकर सोने से आंखों की पीड़ा और आंखों की लाली ठीक हो जाती है।
  29. तिल्ली (प्लीहा): 30 ग्राम मेंहदी की छाल बारीक पिसी हुई, 10 ग्राम नौसादर पिसा हुआ को मिला लें, सुबह 3 ग्राम मेंहदी के पत्तों को गर्म पानी के साथ देने से दो सप्ताह में तिल्ली की सूजन कम हो जाती है।
  30. खूनी दस्त: मेंहदी के बीजों को बारीक पीसकर, घी में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। इन गोलियों को सुबह-शाम पानी के साथ खाने से खूनी दस्त में आराम मिलता है।
  31. घुटनों का दर्द: मेंहदी और एरण्ड के पत्तों को बराबर लेकर पीस लें। फिर इसे थोड़ा गर्म करके घुटने पर लेप करें। इससे घुटनों के दर्द में राहत मिलती है।
  32. शक्ति: वह व्यक्ति जो बहुत ही कमजोर है, उसे मेंहदी के फूल सुंघाने से और पीसकर माथे पर लेप करने से शक्ति मिलती है।
  33. कुष्ठ (कोढ़): मेंहदी के पत्ते और फूलों के रस को दिन में 2 बार आधा-आधा चम्मच देने से कुष्ठ (कोढ़) का रोग ठीक हो जाता है। मेंहदी के पेड़ की 100 ग्राम छाल को 200 मिलीलीटर पानी में उबालें, जब एक चौथाई शेष बचे तो इस काढ़े को नियमित रूप से सुबह-शाम पीने से कुष्ठ (कोढ़) रोग में लाभ होता है।
  34. बेहोशी के दौरे: 5 से 10 ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस दिन में 3 से 4 बार 250 मिलीलीटर दूध के साथ रोगी को देने से गर्मी और सर्दी में बेहोशी के होने वाले दौरे में राहत मिलती है।
  35. बुखार की जलन: मेंहदी के 10 ग्राम फूलों को 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर लुगदी बना लें। इस लुगदी के सेवन से बुखार की जलन, सिर दर्द, हृदय दर्द, अनिद्रा आदि रोगों में राहत मिलती है।
  36. आग से जलने पर: शरीर के आग से जले हुए स्थान पर मेंहदी की छाल को पीसकर गाढ़ा लेप करने से शांति मिलती है।मेंहदी के पत्तों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  37. बालतोड़: पिसी हुई मेंहदी को भिगो लें, जिस तरह भिगोकर हाथों में लगाई जाती है। उसी तरह बालतोड़ की जगह गाढ़ा-गाढ़ा लेप सुबह और शाम को लगाने से बालतोड़ जल्द ही ठीक हो जाता है।
  38. खांसी: 20 ग्राम मेंहदी का रस, 10 ग्राम हल्दी और 5 ग्राम गुड़ को एक साथ मिलाकर चाटने से कफ पतला होकर निकल जाता है और खांसी बंद हो जाती है।
  39. बालों को काला करना: 6 चम्मच मेंहदी, 4 चम्मच सूखा आंवला, 1 चम्मच कॉफी, चौथाई चम्मच कत्था को मिलाकर 1 लोहे के बर्तन में कॉफी के उबले हुए पानी में भिगो दें। दूसरे दिन इनका बालों पर लेप करें। 20 मिनट तक लेप को लगा रहने दें। इसके बाद सिर को धो लें और सिर में आंवले का तेल लगाएं। आंवला बालों के लिए एक प्राकृतिक (कुदरती) देन है। इसे बालों में किसी भी तरीके से लगा सकते हैं और इसका रस पीयें। इससे बाल काले होते हैं।
  40. गुर्दे के रोग: 6 ग्राम मेंहदी के पत्तों को 500 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब 150 मिलीलीटर पानी रह जाये तब इसे छानकर पियें। इसके 2-3 दिन के प्रयोग से गुर्दे का दर्द मिट जाता है।
  41. बवासीर (अर्श): मेंहदी के पत्तों को पानी के साथ पीसकर गुदाद्वार पर लगाकर लंगोट बांधे। इससे बवासीर के मस्से सूख कर गिर जाते हैं।
  42. गठिया रोग: गठिया के दर्द को दूर करने के लिए मेंहदी और एरण्ड के पत्तों को पीसकर लेप करने से दर्द दूर हो जाता है।मेंहदी के ताजे पत्तों को बारीक पीसकर रात को सोते समय दर्द वाले स्थानों पर गाढ़ा लेप लगाएं। इससे गठिया के रोग में जल्द आराम मिलता है। 
  43. हाथ-पैरों के फटने पर: हाथ-पैरों के फटने पर मेंहदी लगाने से लाभ होता है।
  44. हाथ-पैरों की ऐंठन: मेंहदी के पत्तों को पीसकर लगाने से हाथ-पैरों की ऐंठन दूर हो जाती है।
  45. टांसिल : यदि टांसिल ज्यादा बढ़ गये हो तो मेंहदी के पत्तों को जलाकर काढ़ा बना लें इस काढ़े से गरारे करने से टांसिल में आराम आता है।
  46. घमौरियां: घमौरियां होने पर मेंहदी का लेप करने से घमौरियां बिल्कुल खत्म हो जाती हैं। नहाते समय पानी में मेंहदी के पत्तों को पीसकर मिला लें इस पानी से नहाने से शरीर की घमौरियां दूर हो जाती हैं।
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