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रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये 10 फ़ायदे जान गये तो आज डाल कर ही सोओगे

  • नमस्कार मित्रों All Ayurvedic में आपका स्वागत है, आज हम आपको रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के 10 फ़ायदो के बारे में बताएँगे। देशी गाय के घी में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो और किसी चीज़ में नहीं मिलते। यहाँ तक की इसमें ऐसे माइक्रोन्यूट्रींस होते हैं जिनमें कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। देशी गाय का घी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास एवं रोग-निवारण के साथ पर्यावरण-शुद्धि का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। प्रतिदिन रात को सोते वक़्त  नाक में 2 - 2 बूँद गाय के देशी घी डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है। देशी घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले। और पाच मिनट लेते रहे इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है।
नस्य अर्थात नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के ये 10 फ़ायदे :
  1. हार्ट अटैक : हार्ट अटैक जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, ह्रदय मज़बूत होता है।
  2. सोरायसिस और त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक : सोरायसिस गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सोरायसिस के लिए भी कारगर है।
  3. बाल झडना : बाल झडना गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
  4. आँखों की ज्योति बढ़ती है : आँखों की ज्योति एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
  5. कोमा से जगाए : कोमा गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है।
  6. हथेली और पांव के तलवो में जलन : हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।
  7. कफ की शिकायत : कफ की शिकायत गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।
  8. नस्य ना लेने का समय : नस्य ना लेने का समय बीमार पड़ने पर, आघात होने पर या बहुत थका हुआ होने पर, वर्षा ऋतू में जब सूर्य ना हो, गर्भवती या प्रसव के बाद, बाल धोने के बाद, भूक या प्यास लगने पर, अजीर्ण होने पर, आघात होने पर या बहुत थका हुआ होने पर, अनुवासन बस्ती या विरेचन के बाद।
  9. कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता : कैंसर गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है।
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