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आयुर्वेद के अनुसार सुबह उठने का सही तरीका अपनालिया तो रोग आपसे कोषों दूर रहेंगे


आज हम आपको All Ayurvedic के माध्यम से बताएँगे सुबह उठने का सही तरीका। आयुर्वेद के अनुसार, आपको सूर्योदय से पहले जागना चाहिए ताकि आपका शरीर सूरज की ताल के साथ तालमेल बिठा सके। यह वह समय है जब पर्यावरण शुद्ध और शांत होता है, और मन नींद के बाद ताज़ा होता है। दिन के शुरुआती घंटों में उठना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन के बाकी हिस्सों की लय सेट करता है।

आयुर्वेद के अनुसार सुबह उठने का सही तरीका 4 चरणो में 
  1. दाहिनी ओर मुड़ें : जब आप जागने के बाद उठना चाहें, तो पहले अपनी दाहिनी ओर मुड़ें और फिर उठकर बैठ जाएं। जब आप सो रहे होते हैं, तो आपका शरीर आराम की मुद्रा में होता है, और आपकी मेटाबॉलिक गतिविधि भी धीमी होती है। अगर आप अचानक से बायीं करवट लेकर उठते हैं, तो आपके कार्डियाक सिस्टम पर बहुत दबाव बन सकता है।
  2. आराम से बैठें : जागने के बाद अपने बिस्तर पर आराम से बैठें और आसानी से उठें। फिर अपनी हाथेलियों को एक-दूसरे से रगड़ें और अपनी आंखों पर अपनी हथेलियां रखें। अपनी हथेलियों को आपस में रगड़कर आप अपने पूरे तंत्रिका अंत को सक्रिय कर देंगे, और आप तुरंत जागृत महसूस करेंगे। फिर धीरे-धीरे हथेलियों को ऊपर ले जाएं और अपने माथे और कंधे को कवर करें।
  3. सांस का प्रवाह : अब जांचें कि आपकी नाक की किस तरफ से आपकी सांसे अधिक दृढ़ता से निकल रही है। जहां आपको लगता है कि सांस का प्रवाह मज़बूत है उस तरफ की हथेली को चूमें, और फिर दूसरी तरफ की हथेली चूमें। चुंबन से ऊर्जा प्रदान होती है।
  4. बिस्तर से बाहर निकलें : फिर बिस्तर से बाहर निकलें और जिस तरफ की सांस मज़बूत हो, उस तरफ ज़मीन को पहले पैर से छूएं।
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