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पीपल का पत्ता गठिया में वरदान है, ऐसे करे इसका उपयोग



  • गठिया रोग को आमवात, संधिवात आदि नामों से भी जाना जाता है। इस रोग में सबसे पहले शरीर में निर्बलता और भारीपन के लक्षण दिखाई देते हैं। इस रोग के होने पर हाथ के बीच की उंगलियों में दर्द होता है। 
  • अगर इसका इलाज नही किया जाता तो हाथ की दूसरी उंगलियों में भी सूजन व दर्द होने लगता है। गठिया रोग होने पर शरीर की हडि्डयों में दर्द होता है, जिसके कारण रात को रोगी सो भी नहीं पाता है।

गठिया रोग के लक्षण :

  1. भोजन का अच्छा न लगना, अधिक आलस आना, बुखार से शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन, कमर और घुटनों में तेज दर्द जिसके कारण रोगी रात को सो नही पाता है आदि गठिया रोग में होने वाले लक्षण है।
  2.  इसके अलावा इस रोग में रोगी के हाथ-पांव की अंगुलियों में सूजन होती है जिससे अंगुलियां सीधी नही होती है, शरीर के दूसरे भागों में सूजन व दर्द रहता है। इस रोग के होने पर जोड़ो व मांसपेशियों में दर्द रहता है।

गठिया के रोग का इलाज :

  • पीपल और बेलिया के पत्ते व छाल को एक साथ पीसकर लेप बना लें। इसका लेप अंगुलियों व घुटनों पर करने से अंगुलियों व घुटनों की हड्डियां मजबूत होती है।
  • घुटनों के दर्द में त्रिफला, पीपल की जड़, सोंठ, कालीमिर्च और पीपल को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। यह 2 चुटकी चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम लेने से घुटनों का दर्द दूर हो जाता है।
  • 10 ग्राम पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें शहद डालकर सेवन करने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।

किन बातों का करे परहेज :

  • एक वर्ष पुराने चावल, जंगली पशु-पक्षियों के मांस का सूप, एरण्डी का तेल, पुरानी शराब, लहसुन, करेला, परवल, बैंगन, सहजना, लस्सी, गोमूत्र, गर्म पानी, अदरक, कड़वे एवं भूख बढ़ाने वाले पदार्थ, साबूदाना, तथा बिना चुपड़ी रोटी का सेवन करना गठिया रोग में लाभकारी है।
  • इस रोग में फलों का सेवन और सुबह नंगे पैर घास पर टहलना रोगी के लिए लाभकारी होता है। गठिया रोग में रात को सोते समय एक गिलास दूध में जरा-सी हल्दी डालकर पीने से लाभ मिलता है
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