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गन्ने का एक ग्लास जूस गर्मी में तो फ़ायदा करेगा ही लेकिन ये पीलिया का भी रामबाण उपाय है


  • आहार के 6 रसों में मधुर रस का विशेष महत्व है। गुड़चीनी, शर्करा आदि मधुर (मीठे) पदार्थ गन्ने के रस से बनते हैं। गन्ने का मूल जन्म स्थान भारत है। हमारे देश में यह पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, दक्षिण भारत आदि प्रदेशों में अधिक मात्रा में उगाया जाता है। 
  • संसार के अन्य देशों में जावा, क्यूबा, मारीशस, वेस्टइण्डीज, पूर्वी अफ्रीका आदि देशों में बहुत अधिक मात्रा में गन्ने का उत्पादन किया जाता है। 1 साल में गन्ने की बुवाई तीन बार जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और अक्टूबर-नवम्बर में की जाती है। गन्ने को ईख या साठा भी कहते हैं।
  •   गन्ने का रस भोजन से पहले सेवन करने से पित्त का नाश होता है। यह बाद में खाने से वायु (गैस) तथा मन्दाग्नि (भूख) करता है। गन्ने का कोई भी हिस्सा व्यर्थ नहीं होता है। इसके जड़ के टुकड़े पशुओं को खिलाएं जाते हैं। सभी प्रकार के गन्ने का रस-पित्त को मिटाने वाला, बलप्रद, सेक्स शक्ति को बढ़ाने वाला, कफ को बढ़ाने वाला, रस तथा पाक में मीठा, चिकना, भारी, मूत्रवर्धक और शीतल है। कच्चा गन्ना कफ, भेद तथा प्रमेह उत्पन्न करता है। मध्यम गन्ना वायुनाशक, मधुर और पित्तनाशक है।

पिलिया से केसे पाए छुटकारा:

  • गन्ने का रस पीना इस रोग की प्रमुख प्राकृतिक औशधि है। जब गन्ने का मौसम न हो तो चीनी का शर्बत नींबू डालकर पीयें।
  • 1 गिलास गन्ने के रस में दो-चार चम्मच ताजे आंवले का रस 2-3 बार रोज पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
  • गन्ने के टुकड़े करके रात के समय घर की छत पर ओस में रख दें और सुबह मंजन के बाद उन्हें चूसकर रस का सेवन करें। 4 दिन में ही कामला (पीलिया) के रोग में बहुत अधिक लाभ होगा।
  • गन्ने के शुद्ध ताजे रस के साथ जौ के सत्तू का सेवन करने से पाण्डु (पीलिया) रोग में लाभ मिलता है।
  • अमलतास का गूदा अल्पमात्रा में लेकर उसे गन्ने के रस के साथ 2-3 बार रोज सेवन करें।
  • गन्ने का रस, अनार का रस, आंवले का रस और शहद एकसाथ सेवन करने से पीलिया दूर हो जाता है और खून भी बढ़ता है।
  • जौ का सत्तू (जौ को रेत में भूनकर और पीसकर बनाया जाता है) खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीयें। एक सप्ताह में पीलिया ठीक हो जाएगा। सुबह गन्ना भी चूसें। गन्ने का रस दिन में कई बार पीयें। तरल पदार्थ अधिक लें।

ध्यान रखे: 

  • ईख मधुर, ठण्डा तथा चिकना होता है। अत: मधुमेहबुखारसर्दी, मन्दाग्नि, त्वचा रोग और कृमि रोगों में छोटे बच्चों के लिए हितकारी नहीं है। 
  • इसके अलावा जिन लोगों को जुकाम, श्वास और खांसी की स्थायी तकलीफ बनी रहती है तथा जो कफ प्रकृति वाले व्यक्ति हो तो उन्हें गन्ने का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।

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