Categories

कितने भी काले दांत क्यों न हो, ये घरेलु तरीका दूर कर देगा काले से काला धब्बा



  • बबूल का पेड़ रेतीली जमीन में होता है | बबूल को ‘ कीकर ‘ भी कहा जाता है | बबूल की लकड़ी जलाने में अच्छी मानी जाती है |
  • इसकेफूल , पत्ते , छाल , कली , लकड़ी तथा गोंद सभी का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता है | यह पौष्टिक रक्तशोधक तथा अन्य रोगों को नष्ट करने में सहायक है |
  • बबूल कफ (बलगम), कुष्ठ रोग (सफेद दाग), पेट के कीड़ों-मकोड़ों और शरीर में प्रविष्ट विष का नाश करता है।
  • यह गर्मी के मौसम में एकत्रित किया जाता है। इसके तने में कहीं पर भी काट देने पर जो सफेद रंग का पदार्थ निकलता है। उसे गोंद कहा जाता है।

आवश्यक सामग्री :

  • बबूल की छाल-100 ग्राम
  • बबूल की गोंद-50 ग्राम

मुँह के रोग कैसे दूर करे :

  • बबूल की छाल, मौलश्री छाल, कचनार की छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करें। इससे दांत का हिलना, जीभ का फटना, गले में छाले, मुंह का सूखापन और तालु के रोग दूर हो जाते हैं।
  • बबूल, जामुन और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बनाकर उस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
  • बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार गरारे करने से लाभ मिलता है। गोंद के टुकड़े चूसते रहने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
  • बबूल की छाल को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। मुंह के छाले पर इस चूर्ण को लगाने से कुछ दिनों में ही छाले ठीक हो जाते हैं।
  • बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करें। इससे मुंह के छाले ठीक होते हैं।

ध्यान रखें :

  • इसकी मात्रा काढ़े के रूप में 50 ग्राम से 100 ग्राम तक, गोंद के रूप में 5 से 10 ग्राम तक तथा चूर्ण के रूप में 3 से 6 ग्राम तक लेनी चाहिए। इससे ज्यादा सरीर के लिए हानिकारक है।

loading...
Thank you for visit our website

टिप्पणि Facebook

टिप्पण Google+

टिप्पणियाँ DISQUS

MOBILE TEST by GOOGLE launch VALIDATE AMP launch