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आप भी जुड़वाँ बच्चे पाना चाहते है तो, ये पोस्ट आपके काम की है, जरूर पढ़े और शेयर करे



➡ जुड़वां बच्चे पायें :
  • एक शौध के अनुसार 200 स्त्रियों में से सिर्फ 1 स्त्री ऐसी होती है जिसे जुड़वां बच्चे पैदा होते है. ये जुड़वां बच्चे 2 तरह के होते है. पहला – दोनों एक लिंग के और दूसरा – विपरीत लिंग के. एक लिंग के बच्चे ज्यादातर एक ही तरह के कद, शक्ल और स्वभाव के होते है किन्तु कुछ विपरीत लिंग वाले बच्चे ऐसे है जिनकी शक्ल आपस में तो क्या घर के किसी भी सदस्य से नही मिलती। www.allayurvedic.org

➡ जुड़वां बच्चे दो प्रकार से होते है :

  1. एक अण्डज / अभिन्न जुड़वां : जब कोई स्त्री अपनी अण्डकोशिका में एक पुरुष के शुक्राणु के होने से गर्भवती होती है और जब वो शुक्राणु उसकी अण्डकोशिका में 2 कोशिकाओं में बंट जायें तो इससे उस स्त्री को जुड़वां बच्चे जन्म लेते है. जिसे एक अण्डज कहा जाता है क्योकि ये एक अंडे में एक शुक्राणु के दो हिस्सों में बाँटने की वजह से हुआ है। 
  2. द्वि अण्डज / भ्रातृ जुड़वां : जब स्त्री दो अलग अलग पुरुषो के शुक्राणु से दो अलग अलग अण्डकोशिका में शुक्राणु को निषेचित करती है तो उसके गर्भ में दो अंडे बनते है जिससे उसे जुडवा बच्चे पैदा होते है. जिसे द्वि अण्डज कहा जाता है क्योकि इसमें 2 अलग शुक्राणु के 2 अलग अंडे बनते है। 


  • ये जुडवा बच्चे स्त्री पुरुष के एक बार के सहवास क्रिया में ही हो जाते है. स्त्रियों की डिम्बाशय में हर महीने एक नये डिम्ब / अण्डकोशिका का निर्माण होता है, वहीँ पुरुष शुक्राणु अनगिनत होते है. सयोंगवश कभी कभी स्त्रियों में 2 अण्डकोशिका का प्राकृतिक रूप से निर्माण हो जाता है. जिनमे 2 अलग अलग शुक्राणु के 2 बच्चे जन्म लेते है. ये बच्चे थोड़े थोड़े समय के अंतर पर पैदा होते है। www.allayurvedic.org
  • क्योकि अभिन्न जुडवा एक ही शुक्राणु के दो हिस्सों में बटने की वजह से होते है तो इनकी शक्ल, कद और स्वभाव भी समान होते है किन्तु भ्रातृ जुडवा अलग अलग अंडे में होने की वजह से एक दुसरे से अलग होते है, जिससे इनकी आदते और शक्लें एक दुसरे से नही मिलती.
  • जब किसी स्त्री के पेट में जुडवा बच्चे होते है तो उन्हें इस बात का कई महीनो के बाद पता चलता है. इस स्थिति में पेट का आकार सामान्य से ज्यादा बड़ा हो जाता है. इसके बाद गर्भवती स्त्री जुडवा बच्चो के दिल की धड़कन को सुनकर भी इस बात का पता लगा सकती है. एक बात ध्यान रखे कि अगर किसी स्त्री को जुडवा बच्चे हो रहे है तो वो कभी भी अपने घर पर प्रसव न करायें।

➡ जुडवा बच्चे पाने के लिए जरूरी आहार :

  • अगर आप भी जुडवा बच्चे पाना चाहती है तो आप अपनी किस्मत या जीन ( Gene ) के भरोसे न बैठे क्योकि कुछ ऐसे पौष्टिक आहार भी है जो आपके इस सपने को आसानी से पूरा करने में आपकी मदद करते है. इस बात पर पूरी तरह से शौध हुई है और उसी के आधार पर हम आपको ऐसे आहारो के बारे में बता रहे है जिनके नियमित सेवन से आपको जुडवा बच्चे पैदा होने के अवसर बहुत हद तक बढ़ जाते है. ये आहार निम्नलिखित है –
  1. फोलिक एसिड : जब आहार पर शौध हो रही थी तो जुडवा बच्चो के जन्म और आहार में फोलिक एसिड को साथ में रखकर देखा गया. अध्ययन में पाया गया कि फोलिक एसिड शुक्राणु को दो हिस्सों में बांटने में सहायक है जिससे अभिन्न जुडवा होने की सम्भावना बनती है तो आप अपने आहार में बींस, पालक और चुकंदर को जरुर शामिल करें. आपको जुडवा बच्चे होने के अवसर बहुत हद तक बढ़ जाते है।
  2. काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट : काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट से ओव्यूलेशन की क्षमता बहुत हद तक बढ़ जाती है. तो अगर आप जुडवा बच्चे चाहते हो तो आप पाने खाने में काम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट को जरुर शामिल करें. जिसके लिए आप साबुत अनाज, बींस और हरी सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक करें। www.allayurvedic.org
  3. जिमीकंद : अफ्रीका की एक जनजाति है जिसका नाम है यारुबा, इस जनजाति में देखा गया है कि इन्हें ज्यादातर जुडवा बच्चे ही पैदा होते है. इस अदभुत बात को पता लगाने के लिए शौध की गई जिसमे पाया गया कि ये अपने आहार में जिमीकंद का सबसे अधिक सेवन करते है. जिमीकंद में एक रसायन होता है जो हाइपर ओव्यूलेशन में मददगार सिद्ध होता है।
  4. डेरी उत्पाद : हर डेरी उत्पाद में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है. कैल्शियम न सिर्फ हड्डियों के लिए बल्कि प्रजनन प्रणाली के लिए बहुत लाभदायी होता है और इसे स्वस्थ रखता है. इसलिए जो स्त्रियाँ दूध पीती है उन्हें जुडवा बच्चे होने की 5 गुना ज्यादा सम्भावना होती है. इसलिए महिलाओं को जुडवा बच्चे पाने के लिए दूध, चीज, मक्खन, पनीर और दही का अधिक सेवन करना चाहियें।
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