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मानसून में उल्टी, दस्त, सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर और बैक्टीरियल इंफेक्शन के खतरों को जड़ से मिटाये



  • मानसून के आते ही उल्टी, दस्त, सर्दी-जुकाम के अलावा वायरल फीवर और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जानें इनसे कैसे करें बचाव…।
  • नमी वाले कपड़े न पहनें। इनसे बेक्टीरियल-फंगल इंफेक्शन हो सकता है। बचाव के लिए एंटीफंगल पाउडर का प्रयोग कर सकते हैं।
1. स्क्रब टायफस: शरीर पर छोड़ता है पपड़ीनुमा काला निशान
–डेंगू के साथ इसके मामले भी तेजी से बढ़े हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाले इस रोग में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटती है। इससे शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है।
–लक्षण : पिस्सू के काटने के 1-3 हफ्ते में मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान (एस्चार मार्क) दिखता है। समय रहते इलाज न होने पर रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले लेता है।प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती हैं।
–इलाज : 7-14 दिन तक एंटीबायोटिक्स देते हैं।
–सावधानी : निमोनिया बिगडऩे पर मरीज में ऑक्सीजन का स्तर भी असामान्य हो जाता है। साथ ही किडनी और लिवर में दिक्कत होने से मरीज बेहोश हो सकता है जिसके लिए समय पर इलाज जरूरी है।
–होम्योपैथिक इलाज : ज्यादा पसीने के साथ यदि मरीज का शरीर ठंडा पड़ जाए तो मर्कसॉल दवा देते हैं।
–विशेषकर शाम के समय सर्दी लगने, रात को पैर ठंडे पडऩे, पसीना ज्यादा आना, मन उदास रहने के अलावा यदि मरीज को आवाज या रोशनी सहन न हो तो फॉस्फोरस दवा दी जाती है।
2. डेंगू : हाथ-पैरों में तेज दर्द के साथ खांसी-जुकाम का होना
–यह चार तरह के डेंगू वायरस से फैलता है जो एडीज मच्छर के काटने से होता है।
–लक्षण : मच्छर काटने के 4-10 दिन में बुखार आने, हाथ-पैरों में तेज दर्द, खांसी-जुकाम व गले में दर्द होना। यदि मरीज एक प्रकार के बाद दूसरे तरह के डेंगू वायरस की चपेट में आए तो स्थिति गंभीर हो जाती है। रोगग्रसित होने के 4-5 दिन बाद प्लेटलेट्स गिरने से मुंह-नाक से रक्तस्त्राव, पेट व फेफड़ों में पानी भरने व बीपी गिरने लगता है।
–इलाज : आमतौर पर यह कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाता है। लेकिन गंभीर स्थिति में मरीज को आईवी फ्लूइड देते हैं। जरूरत पडऩे पर प्लेटलेट्स भी चढ़ाते हैं।
–सावधानी : नाक से ब्लीडिंग, काले रंग का मल, त्वचा पर लाल चकत्ते प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण हैं। यदि सांस लेने में भी दिक्कत हो तो हो सकता है रोग के कारण फेफड़े प्रभावित हुए हैं। पेनकिलर न लें।
–होम्योपैथी उपचार : दिमागी कमजोरी, खून की उल्टी, याददाश्त व प्लेटलेट्स कम होने पर क्रोटेलस हॉरीडस दवा देते हैं। हृदय की धड़कन तेज होने व तेज बुखार में आर्सेनिक एल्बम देते हैं।
3. मलेरिया : कंपकपी के साथ बार-बार बुखार का चढऩा-उतरना
–यह प्लाजमोडियम परजीवी की पांच प्रजातियों से फैलता है। इसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर है। वाइवेक्स व फैल्सीपैरम जानलेवा हो सकते हैं जो फेफड़ों व किडनी को प्रभावित कर रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा घटा देते हैं।
–लक्षण : मच्छर काटने के 9-18 दिन बाद से मरीज को ठंड लगकर बुखार आता है, जो 24-48 घंटों के अंतराल में उतरता व चढ़ता रहता है। तेज सिरदर्द व बुखार उतरने पर मरीज को काफी पसीना आता है।
–इलाज : एंटीमलेरियल दवाएं देते हैं।
–सावधानी : वाइवेक्स परजीवी वाले मच्छर के काटने पर प्राइमाक्यूनीन दवा का पूरा कोर्स लेना जरूरी है। वर्ना यह रोग दोबारा हो सकता है। डॉक्टरी सलाह से प्रिवेंटिव डोज के तौर पर कीमोप्रोफाइलेक्सिस देते हैं।
–होम्योपैथिक इलाज : सर्दी लगने, अनिद्रा व कमजोरी के कारण शरीर टूटने पर चायना आर्स दवा देते हैं। तेज बुखार व शरीर पर लाल चकत्ते उभरें, बेलाडोना दवा देते हैं। ज्यादा पसीना आने, इम्युनिटी घटने व मुंह में नमकीन स्वाद आने पर नेट्रम म्यूर दवा दी जाती है।      www.allayurvedic.org
4. डायरिया : खुले में बिकते खाद्य पदार्थों से फूड पॉइजनिंग का खतरा
–लंबे समय से जमा बारिश के पानी में मक्खी-मच्छर की तादाद बढ़ती है। इनसे खुले में बिक रही खानपान की चीजों के दूषित होने की आशंका रहती है।
–लक्षण : पेटदर्द, उल्टी, दस्त व पेट के इंफेक्शन जैसी समस्या ज्यादा होती है।
–इलाज : घर पर ही ओआरएस और नमक व शक्कर का घोल देने से स्थिति सामान्य हो जाती है। लेकिन स्थिति गंभीर होने पर आईवी फ्लूइड देते हैं। कई बार ज्यादा उल्टी होने पर मरीज के मुंह से तरल न लेने पर इंजेक्टेबल आईवी फ्लूइड देते हैं।
–सावधानी : मरीज को तरल पदार्थ देते रहें।
–होम्योपैथिक इलाज : पेट में मरोड़ व दर्द के साथ पानी जैसे दस्त या कब्ज में पोडोफाइलम दवा से लाभ हो सकता है। फूड पॉइजनिंग की दिक्कत में दस्त, उल्टी व चक्कर आए तो आर्सेनिक दवा देते हैं।
5. चिकनगुनिया : जोड़ों में तेज दर्द के साथ बुखार
–यह वायरल रोग है जो एडीज इजिप्टी व एडीज एब्लोपिक्टस मच्छर के काटने से होता है।
–लक्षण : इसमें व्यक्ति को बुखार के साथ शरीर के सभी जोड़ों में तेज दर्द होता है। जिससे वह चल-फिर नहीं पाता। साथ ही उसे सिरदर्द, जोड़ों में सूजन और रेशेज की समस्या भी होती है।
–इलाज : दर्द की दवाएं व फ्लूइड दिया जाता है।
–सावधानी : कई बार इलाज के बाद भी मरीज को जोड़ों में दर्द बना रहता है। ऐसे में मरीज को खूब सारा पानी पीने और आराम करने की सलाह देते हैं।
–होम्योपैथिक इलाज : शरीर टूटने और ज्यादा सिरदर्द होने पर यूपीटोरियम पर्फ दवा से इलाज होता है।जोड़ों में दर्द बने रहने के साथ ज्यादा सर्दी लगने पर रसटॉक्स दवा देते हैं। मरीज की जीभ सफेद होने, सर्दी लगने के साथ पानी की प्यास ज्यादा लगने पर ब्रायोनिया देते हैं।
6. कंजक्टिवाइटिस : बैक्टीरियल इंफेक्शन बढ़ाता गंभीरता
बरसात के दिनों में आंखों से जुड़ा रोग कंजक्टिवाइटिस आम है। यह संक्रामक रोग एडीनो वायरस की वजह से होता है। ज्यादातर मामलों में यदि यह वायरल तरीके से व्यक्ति की एक या दोनों आंखों को प्रभावित करे तो 4-5 दिन में खुद ही ठीक हो जाता है। लेकिन इसके साथ आंख में बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हो जाए तो स्थिति गंभीर होने से मरीज को कम दिखने के अलावा आंख से पीला पदार्थ निकलने की समस्या भी हो सकती है। इसे ठीक होने में 2-3 हफ्ते लगते हैं।
–लक्षण : वायरल इंफेक्शन में आंख में लालिमा, पानी निकलने व रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढऩे और कुछ मामलों में मरीज को हल्का बुखार व गला खराब होने की शिकायत रहती है।
–इलाज : आंखों में नमी बनाए रखने और चुभन, जलन व रोशनी के प्रति संवेदनशीलता कम करने के लिए लूब्रिकेंट्स डालने के लिए देते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर कल्चर टैस्ट करते हैं। जिसमें आशंकित बैक्टीरिया के अनुसार एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं।
➡ आयुर्वेदिक नुस्खे बढ़ाते इम्युनिटी :
  • –डेंगू में 1-1 चम्मच महादर्शन क्वाथ सुबह-शाम खाने के बाद पीने से बुखार घटता है।
  • –मलेरिया में 5 तुलसी के पत्ते, छोटा टुकड़ा अदरक व दो काली मिर्च, एक गिलास पानी में 1/4 होने तक उबालें। गुनगुना सुबह-शाम पीएं, बुखार कम होगा।
  • –स्क्रब टायफस में सहजन के 20 पत्तों को एक गिलास पानी में 1/3 होने तक उबालें। सुबह-रात पीएं। www.allayurvedic.org
  • –डायरिया में दो चम्मच दही व एक चम्मच ईसबगोल की भूसी को मिलाकर 4-4 घंटे के अंतराल में मरीज को दें। यदि मरीज को डायबिटीज नहीं है तो एक केले को आधा चम्मच ईसबगोल की भूसी के साथ मैश कर लें। इसे सुबह, दोपहर व शाम को दे सकते हैं।
  • –चिकनगुनिया होने पर हरसिंगार के 5 पत्तों को एक चौथाई चम्मच अजवाइन के साथ एक गिलास पानी में उबालें। सुबह-शाम पीने से जोड़ दर्द में आराम मिलेगा।
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