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भ्रामरी प्राणायाम : थाइरोइड, रक्त चाप, अनिद्रा, चिंता, तनाव और बुद्धि आदि

भ्रामरी प्राणायाम : थाइरोइड, रक्त चाप, अनिद्रा, चिंता, तनाव और बुद्धि आदि।
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आजकल की दौड़-भाग और तनाव की जिंदगी में दिमाग और मन को शांत कर चिंता, भय, शोक, इर्ष्या और मनोरोग को दूर भगाने के लिए योग और प्राणायाम से अच्छी कोई और चीज नहीं हैं। मानसिक तनाव और विचारो को काबू में करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम किया जाता हैं। भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर (काले भँवरे) के समान आवाज होने के कारण इसे अंग्रेजी में Humming Bee Breath भी कहा जाता हैं। यह प्राणायाम हम किसी भी समय कर सकते हैं। खुर्ची पर सीधे बैठ कर या सोते समय लेटते हुए भी यह किया जा सकता हैं।
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• भ्रामरी प्राणायाम की विधि :
सबसे पहले एक स्वच्छ और समतल जगह पर दरी / चटाई बिछाकर बैठ जाए।
पद्मासन या सुखासन में बैठे।
अब दोनों हाथो को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।
दोनों हाथो को कुहनियो (Elbow) से मोडकर हाथ को कानों के पास ले जाए।
अब अपनी दोनों हाथों के अंगूठो (Thumb) से दोनों कानों को बंद कर लें।
अब दोनों हाथो की तर्जनी (Index) उंगली को माथे पर और मध्यमा (middle), अनामिका (Middle) और कनिष्का (Little) उंगली को आँखों के ऊपर रखना हैं।
कमर, पीठ, गर्दन तथा सिर को सिधा और स्थिर रखे।
अब नाक से श्वास अंदर लें। (पूरक)
नाक से श्वास बाहर छोड़े। (रेचक)
श्वास बाहर छोड़ते समय कंठ से भ्रमर के समान आवाज करना हैं। यह आवाज पूर्ण श्वास छोड़ने तक करना है और आवाज आखिर तक समान होना चाहिए।
श्वास अंदर लेने का समय 10 सेकंड तक होना चाहिए और बाहर छोड़ने का समय 20 से 30 सेकंड तक होना चाहिए।
शुरुआत में 5 मिनिट तक करे और अभ्यास के साथ समय बढ़ाये।
भ्रामरी प्राणायाम करते समय आप सिर्फ तर्जनी उंगली से दोनों कान बंद कर बाकि उंगली की हल्की मुट्ठी बनाकर भी अभ्यास कर सकते हैं।
आप चाहे तो शरुआत में बिना कान बंद किये भी यह प्राणायाम कर सकते हैं।
शन्मुखी मुद्रा - अंगूठे से दोनों कान बंद करना। तर्जनी उंगली को हल्के से आँखों के ऊपर आँखों के नाक के पासवाले हिस्से तक रखना हैं। मध्यमा उंगली को नाक के पास रखना हैं। अनामिका उंगली को होंटो (lips) के ऊपर और और कनिष्का उंगली को होंटो के निचे रखना हैं। इस मुद्रा में भी भ्रामरी प्राणायाम किया जा सकता हैं।
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भ्रामरी प्राणायाम के लाभ :
भ्रामरी प्राणायाम से निचे दिए हुए लाभ होते है-
क्रोध, चिंता, भय, तनाव और अनिद्रा इत्यादि मानसिक विकारो को दूर करने में मदद मिलती हैं।
मन और मस्तिष्क को शांति मिलती हैं।
सकारात्मक सोच बढ़ती हैं।
अर्धशिशी / Migraine से पीडितो के लिए लाभकारी हैं।
बुद्धि तेज होती हैं।
स्मरणशक्ति बढ़ती हैं।
उच्च रक्तचाप को के रोगियों के लिए उपयोगी हैं।
भ्रामरी प्राणायाम करते समय ठुड्डी (Chin) को गले से लगाकर (जालंदर बंध) करने से थाइरोइड रोग में लाभ होता हैं।
Sinusitis के रोगियों को इससे राहत मिलती हैं।
भ्रामरी प्राणायाम में क्या एहतियात बरतने चाहिए ?
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• भ्रामरी प्राणायाम में निचे दिए हुए एहतियात बरतने चाहिए :
कान में दर्द या संक्रमण होने पर यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
अपने क्षमता से ज्यादा करने का प्रयास न करे।
प्राणायाम करने का समय और चक्र धीरे-धीरे बढ़ाये।
भ्रामरी प्राणायाम करने के बाद आप धीरे-धीरे नियमति सामान्य श्वसन कर श्वास को नियंत्रित कर सकते हैं। भ्रामरी प्राणायाम करते समय चक्कर आना, घबराहट होना, खांसी आना, सिरदर्द या अन्य कोई परेशानी होने पर प्राणायाम रोककर अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।
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