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शिवलिंग (ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा) संतान के लिए किसी वरदान से कम नही

शिवलिंग (ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा) : संतान के लिए
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* भारत के वनांचलों, खेत खलिहानों, आँगन के बाडों आदि में इसे प्रचुरता से उगता हुआ
देखा जा सकता है। इसके बीजों को देखने से स्पष्ठरूप से शिवलिंग की रचना दिखाई देती है
* शिवलिंगी का वानस्पतिक नाम ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा होता है।
* संतानविहीन दंपत्ती के लिये ये पौधा एक वरदान है। महिला को मासिक धर्म
समाप्त होने के 4 दिन बाद प्रतिदिन सात दिनों तक संजीवनी के 5 बीज खिलाए जाए तो महिला के गर्भधारण की संभावनांए बढ जाती है।
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* शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड के साथ पीसकर संतानविहीन महिला को खिलाया जाता है,महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।इसकी पत्तियों की चटनी बनाती है, इनके अनुसारे ये टॉनिक की तरह काम करती है। जिन महिलाओं को संतानोत्पत्ति के लिए इसके बीजों का सेवन कराया जाता है उन्हें विशेषरूप से इस चटनी का सेवन कराया जाता है ,पत्तियों को बेसन के साथ मिलाकर सब्जी के रूप में भी खाया जाता है, आदिवासी भुमकाओं (हर्बल जानकार) के अनुसार इस सब्जी का सेवन गर्भवती महिलाओं को करना चाहिए जिससे होने वाली संतान तंदुरुस्त पैदा होती है।
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* शिवलिंगी के बीजों का उपयोग कर एक विशेष फार्मुला तैयार करते हैं ताकि जन्म लेने
वाला बच्चा चुस्त, दुरुस्त और तेजवान हो। शिवलिंगी, पुत्रंजीवा, नागकेशर और पारस
पीपल के बीजों की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना लिया जाता है और इस चूर्ण
का आधा चम्मच गाय के दूध में मिलाकर सात दिनों तक उस महिला को दिया जाता है
जिसने गर्भधारण किया होता है।
* इसके बीजों के चूर्ण को बुखार नियंत्रण और बेहतर सेहत के लिए
उपयोग में लाते हैं। अनेक हिस्सों में इसके बीजों के चूर्ण को त्वचा रोगों को ठीक करने
के लिए भी इस्तमाल किया जाता है |
* भारत के वनांचलों, खेत खलिहानों, आँगन के बाडों आदि में इसे प्रचुरता से उगता हुआ
देखा जा सकता है। इसके बीजों को देखने से स्पष्ठरूप से शिवलिंग की रचना दिखाई देती है
* शिवलिंगी का वानस्पतिक नाम ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा होता है।
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* संतानविहीन दंपत्ती के लिये ये पौधा एक वरदान है। महिला को मासिक धर्म समाप्त होने के 4 दिन बाद प्रतिदिन सात दिनों तक संजीवनी के 5 बीज खिलाए जाए तो महिला के गर्भधारण की संभावनांए बढ जाती है।
* शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड के साथ पीसकर संतानविहीन महिला को खिलाया जाता है,महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।इसकी पत्तियों की चटनी बनाती है, इनके अनुसारे ये टॉनिक की तरह काम करती है। जिन महिलाओं को संतानोत्पत्ति के लिए इसके बीजों का सेवन कराया जाता है उन्हें विशेषरूप
से इस चटनी का सेवन कराया जाता है ,पत्तियों को बेसन के साथ मिलाकर सब्जी के रूप में भी खाया जाता है, आदिवासी भुमकाओं (हर्बल जानकार) के अनुसार इस सब्जी का सेवन गर्भवती महिलाओं को करना चाहिए जिससे होने वाली संतान तंदुरुस्त पैदा होती है।
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वाला बच्चा चुस्त, दुरुस्त और तेजवान हो। शिवलिंगी, पुत्रंजीवा, नागकेशर और पारस
पीपल के बीजों की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना लिया जाता है और इस चूर्ण
का आधा चम्मच गाय के दूध में मिलाकर सात दिनों तक उस महिला को दिया जाता है
जिसने गर्भधारण किया होता है।
* इसके बीजों के चूर्ण को बुखार नियंत्रण और बेहतर सेहत के लिए
उपयोग में लाते हैं। अनेक हिस्सों में इसके बीजों के चूर्ण को त्वचा रोगों को ठीक करने
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